कमालगंज। जंजाली नगला में सिंचाई विभाग की ओर से बनाई गई 5.18 करोड़ की परियोजना भी गंगा की कटान नहीं रोक सकी। कटान होने के बाद प्रशासन ने गुरुवार को गांव खाली करने के निर्देश दिए हैं। पीड़ित परिवारों को बसाने के लिए जमीन की पैमाइश कराई गई।
सिंचाई विभाग ने कल्लू नगला, धारा नगला व जंजाली नगला में गंगा के किनारे बालू भरी बोरियां व पानी में सीमेंट के स्टड लगाकर कटान रोकने का सपना दिखाया था। 21 जून को जल शक्ति मंत्री स्वतंत्रदेव सिंह ने परियोजना का निरीक्षण करने के समय सवाल उठाया था, कि क्या इससे कटान रोक लोगे। इस पर अधिशाषी अभियंता द्रुण कुमार ने कहा था कि कटान रोक लेंगे। पांच करोड़ से ज्यादा खर्च होने पर भी कटान नहीं रुका। शुक्रवार को जंजाली नगला में रामपाल के घर से भारत के घर तक 30 मीटर के दायरे में तेजी से कटान होता रहा। ज्वाइंट मजिस्ट्रेट संजय कुमार ने प्रधान पप्पू यादव के साथ कटान का जायजा लिया। प्रधान का कहना है कि सिंचाई मंत्री को पहले ही शंका थी। केवल बालू भरी बोरियों व सीमेंट के स्टड से कटान कैसे रुक सकता है। इसके लिए तो पत्थरों का काम होना चाहिए। जो काम हुआ भी उस पर गांव वाले लापरवाही को लेकर सवाल उठा रहे हैं। पूरी बोरियां भी नहीं लगीं, स्टड में झाड़-झंखाण नहीं भरवाया, बारिश का पानी निकलने के लिए बोरियों के बीच रास्ता बनवाने पर ध्यान नहीं दिया गया। वहीं 35 कटान पीड़ितों को मकान के लिए छीतापुर कपूरापुर में आवंटित जमीन की ज्वाइंट मजिस्ट्रेट ने पैमाइश कराई। गुड्डू प्रधान, लेखपाल अभय त्रिवेदी, अमित प्रताप भी रहे।