शहर में अगर गली-कूचों में आग लगे तो इसे बुझाने की जिम्मेदारी शहरियों की
खुद की होगी। क्योंकि शहर के मुख्यमार्गों पर कहीं भी हाईडेंट नहीं बने
हैं। ऐसे में गली-कूचों में फायर ब्रिगेड के न पहुंचने से आग लगने पर
शहरियों को बुझाने के लिए तैयार रहना होगा।
सदर नगर पालिका के अनुसार
फर्रुखाबाद और फतेहगढ़ युग्म नगरों में करीब तीन सौ से ज्यादा गलियां
होंगी। कुछ गलियों में मुख्य बाजार भी हैं। यह गलियां हैं सेठ गली, तिवारी
गली, चूड़ी वाली गली, स्टेट बैंक गली, मोमबत्ती गली, कसरट्टा गली और कटरा
डौरूनाथ गली। इसके अलावा और भी गली-कूंचे हैं। इनमें सैकड़ों की आबादी रहती
है। इन गलियों
में अगर आग लग जाए तो उसे बुझाने के लिए न तो पालिका
प्रशासन और न ही फायर ब्रिगेड विभाग ने कोई इंतजाम किए हैं। शहर के
मुख्यमार्गों पर कहीं भी हाईडेंट नहीं हैं। गली-कूचों में आग लगे तो फायर
कर्मियों को आग बुझाने के लिए पर्याप्त पानी भी नहीं मिल सकेगा। ऐसे में
साफ है कि अगर गलियों में आग लगे तो उसे बुझाने के लिए शहरी खुद ही तैयार
रहें।
बताते हैं कि वर्ष 1996 में फायरब्रिगेड विभाग के मुख्यमार्ग
पक्का पुल, त्रिपोलिया चौक, नेहरू रोड, रेलवे रोड स्थित मठिया देवी मंदिर
के पास, स्टेट बैंक के पास और घुमना तिराहे पर फायर पोस्ट बनाए थे। सड़कों
के निर्माण के दौरान यह हाईडेंट दब गए। अब कोई भी हाईडेंट मुख्यमार्ग पर
नहीं है। ऐसे में आग लगने पर फायर कर्मियों को पानी की दिक्कत का सामना
करना पड़ता है। नगर पालिका ने टाउन हाल स्थित पुरानी टंकी, क्रिश्चियन इंटर
कालेज के अंदर, कांशीराम कालोनी हैवतपुर गढ़िया, पटेल पार्क, लिंजीगंज
पानी टंकी और फतेहगढ़ जिला अस्पताल में हाईडेंट टैंक बनवा रखे हैं।
गली-कूचों में आग लगने पर इसका लाभ शहरियों को नहीं मिल पाता है।
वर्जन
आग
बुझाने की जिम्मेदारी फायर ब्रिगेड की है। फिर चाहे कहीं भी आग लगे। नगर
पालिका प्रशासन ने फायर कर्मियों की सुविधा के लिए टाउनहाल स्थित पुरानी
टंकी के पास, क्रिश्चियन इंटर कालेज के अंदर, कांशीराम कालोनी, पटेल पार्क,
लिंजीगंज पानी टंकी के पास और जिला अस्पताल फतेहगढ़ में हाईडेंट बनवा रखे
हैं। यह सभी हाइडेंट चालू हैं। आवश्यकता
पड़ने पर फायर कर्मी यहां से पानी
ले जा सकते हैं। गली-कूचों में आग लगने पर नगर पालिका प्रशासन पानी के
टैंकर घटनास्थल पर भिजवाता है। टैंकर में फायर ब्रिगेड का पाइप जोड़कर पानी
से आग बुझाई जाती है। गर्मियों में आग की घटनाएं ज्यादा होती हैं।-सुहेल
अली, जोन प्रभारी, नगर पालिका
गली के दुकानदार रहते चिंतित
गलियों में स्थित दुकानदार आग के भय से हमेशा चिंतित रहते हैं। इनका कहना
है कि आग की घटना से निपटने के लिए फायर ब्रिगेड और नगर पालिका प्रशासन को
ठोस इंतजाम करने चाहिए। शहर की व्यस्ततम सेठ गली में रेडीमेड वस्त्र
विक्रेता रोमिल रस्तोगी कहते हैं कि इस गली में सुबह से शाम तक सबसे ज्यादा
भीड़ रहती है। एक-दो बार आग लग चुकी है। संकरी गली होने से फायर ब्रिगेड
नहीं पहुंच पाई थी। दुकानदारों ने सबमसर्बिल, हैंडपंप और टुल्लू पंप चलाकर
जैसे-तैसे आग
पर काबू पाया था। फायर ब्रिगेड और नगर पालिका प्रशासन को आपात
स्थिति से निपटने के लिए पर्याप्त इंतजाम करने चाहिए। मोमबत्ती गली में
बेल्ट की दुकान रखे मोनू कुमार कहते हैं कि करीब दो साल पहले शार्ट सर्किट
से एक थोक दवा की दुकान में आग लग गई थी। फायर ब्रिगेड आई थी लेकिन गली के
अंदर नहीं पहुंच सकी थी। दुकानदारों ने जैसे-तैसे मशक्कत कर खुद ही आग
बुझाई थी। कटरा डौरूनाथ गली के सर्राफा कारीगर टिन्नी वर्मा कहते हैं कि
गलियों में आग बुझाने के लिए ऐसे इंतजाम किए जाएं, जिससे समय रहते आग बुझाई
जा सके।