एआरटीओ के पुराने कार्यालय से ही सामान्य से स्लीपर में तब्दील हुई बसों की फाइलें चोरी हुई थीं। पंजीयन का रिकार्ड वहीं रखा था। विवेचक को दिए बयानों में एआरटीओ ने इसका खुलासा किया है। आफिस वहां से आने के बाद रिकार्ड पुराने कार्यालय में क्यों रखा रहा, इसका जवाब नहीं दिया गया। विवेचक ने एआरटीओ के बयान के बाद बाहर दलालों के बिस्तरों का वीडियो बनाया और कई लोगों से पूछताछ भी की।
कन्नौज में बस माफिया विमल की सामान्य से स्लीपर में तब्दील हुई बस दस जनवरी को भीषण हादसे का शिकार हुई थी। इसमें बीस से अधिक लोगों की जान चली गई थी। इसके बाद से स्लीपर बसों का रिकार्ड जांच के लिए खंगाला गया। रिकार्ड जिला पंचायत के भवन में रहे पुराने एआरटीओ कार्यालय में ही रखा था।
जून में आफिस नेकपुर कला के प्राइवेट भवन में किराये पर आ गया था पर रिकार्ड वही रखा रहा था। दुर्घटना के बाद रिकार्ड मंगवाकर नए आफिस में रखा गया। जब विमल की सामान्य से स्लीपर में तब्दील हुई बसों की फाइलें खंगाली गईं तो पता चला कि सोलह स्लीपर बसों की फाइलें ही गायब हो गईं हैं।
इस पर एआरटीओ शांतिभूषण पांडेय ने अज्ञात लोगों के खिलाफ 18 जनवरी को फतेहगढ़ कोतवाली में फाइलें चोरी करने का मुकदमा दर्ज कराया था। मुकदमे की जांच दरोगा सीमा पटेल को दी गई। बुधवार को सीमा पटेल ने एआरटीओ के बयान दर्ज किए।
इसमें खुलासा हुआ कि फाइलें पुराने आफिस से ही चोरी गई हैं। दरोगा ने एआरटीओ के बयान के बाद दलालों के बिस्तरों का वीडियो भी बनाया और आफिस के पास बैठे दलालों से पूछताछ भी की।