जिले के नोडल अधिकारी आयुक्त एवं सचिव राजस्व परिषद ने मंगलवार सुबह सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र कमालगंज खुलते ही पहुंच गए। वहां उन्होंने निरीक्षण किया। ब्लाक प्रोग्राम मैनेजमेंट यूनिट (बीपीएम) की खिड़कियों में जाली न लगे होने से वह नाराज हुए। पुराने आवासों की खस्ता हालत देख अभी तक मरम्मत के लिए प्रस्ताव व मांग पत्र न भेजे जाने पर भी रोष जताया। महिला चिकित्सक अनुपस्थित पाई गईं। उनके खिलाफ विभागीय कार्रवाई के निर्देश दिए।
जिले के नोडल अधिकारी रजनीश गुप्ता मंगलवार सुबह 10 बजे सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र कमालगंज पहुंचे। मुख्य गेट के पास स्थित बीपीएम यूनिट में वह गए। यूनिट में कुछ खिड़कियां टूटी और जाली भी नहीं लगी थी। नाराजगी के साथ तत्काल जाली लगवाने के निर्देश दिए।
वहां से बाहर निकले तो उनकी नजर अस्पताल परिसर में बने पुराने आवासों में पर पड़ी। टूटफूट दिखाई पड़ने पर पूछा कि अभी तक मरम्मत के लिए प्रस्ताव व एस्टीमेट क्यों नहीं भेजा। वह ओपीडी कक्ष में पहुंचे तो डॉ. ममता अरुण अनुपस्थित थीं। इस पर वह बोले महिला चिकित्सक समय पर नहीं आएंगी तो महिला रोगियों का कैसे इलाज होगा।
उन्होंने महिला चिकित्सक के खिलाफ आवश्यक कार्रवाई के निर्देश मौके पर मौजूद सीएमओ डॉ. चंद्रशेखर को दिए। ड्रेसिंग कक्ष में फर्श टूटा होने से उन्होंने फर्श सही कराकर टायल लगवाने के निर्देश दिए। दीवार पर बनी नाम सूची को सही करवाने के निर्देश दिए। पिछले वर्ष खुली आधुनिक डिजिटल एक्सरे यूनिट को भी देखा।
अब तक 493 डिजिटल एक्सरे होने की सराहना की। पैथालॉजी कक्ष में लगी मशीनें देखीं। अस्पताल से निकलते समय बाहर लगे बोर्ड फ्रेम को देखा जो खाली पड़ा था। उसका उपयोग न करने के सवालों का अधिकारी उत्तर न दे सके। सीडीओ डॉ. राजेंद्र पैँसिया, एसीएमओ डॉ. दलवीर सिंह, प्रभारी चिकित्साधिकारी डॉ. सोमेश अग्निहोत्री, चिकित्सक डॉ. मान सिंह वर्मा व डॉ. विकास पटेल भी मौजूद रहे।
नोडल अधिकारी के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र कमालगंज के निरीक्षण को लेकर कई दिनों से स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों में खौफ था। रविवार को सीएमओ ने सीएचसी का निरीक्षण कर व्यवस्था दुरुस्त करने को कहा था। लेकिन निरीक्षण के एक दिन पूर्व तक जब व्यवस्था नहीं सुधर सकी तो सोमवार देर रात तक काम चलता रहा।
स्वास्थ्य विभाग के कर्मचारी अस्पताल को चमकाने में जुटे रहे। प्रवेश द्वार के पास व ओपीडी कक्ष में लगे पंखों को साफ करते रहे। कोई शीशे साफ कर रहा था तो कोई मेज चमकाने में लगा था। कमरों की लाइट भी चेक की जा रही थी। खराब बल्ब भी बदलवाए जा रहे थे। प्रसव केंद्र में महिला कर्मचारी बाल्टी से पानी डालकर फर्श को धोने में लगी थीं। महिला मरीज भर्ती कक्ष में भी फर्श की धुलाई की गई।