फर्रुखाबाद। कोरोना महामारी में मां-बाप का साया उठने से कई बच्चे अनाथ हो गए। जिले में ऐसे 47 बच्चों को चिह्नित कर लिया गया है। इनके आवेदन भराने के साथ सत्यापन के लिए फाइल एसडीएम व बीडीओ को भेज दी गई। पात्र बच्चों को अगले माह से मुख्यमंत्री बाल सेवा योजना के तहत चार हजार रुपये प्रति माह मिलना शुरू होने की उम्मीद है।
फतेहगढ़ के मोहल्ला वनखड़िया निवासी दिव्यांग लालाराम शाक्य (80) के पुत्र धर्मेंद्र की 17 मई को कोरोना से मौत हो गई थी। जबकि आर्थिक तंगी के चलते पुत्रवधू चार वर्ष पूर्व पहले ही छोड़कर चली गई। बेटे की मौत होने से उनका सात वर्षीय पौत्र अनाथ हो गया। इस संबंध में अमर उजाला ने 14 जून के अंक में समाचार प्रकाशित किया।
इसी के बाद बाल संरक्षण अधिकारी सचिन सिंह ने टीम के साथ लालाराम के घर जाकर जांच की। आर्थिक हालात देखकर सात वर्षीय मासूम को मुख्यमंत्री बाल सेवा योजना के तहत अनाथ बच्चों की सूची में शामिल कर लिया। इसके बाद मासूम को योजना का लाभ दिलाने के लिए फाइल सत्यापन को एसडीएम सदर के पास भेज दी गई है।
जिला प्रोबेशन अधिकारी अनिल चंद्रा ने बताया कि शून्य से 18 वर्ष से कम आयु के उन बच्चों को योजना का लाभ मिलेगा, जिनके माता-पिता, मां या पिता की कोरोना से मौत हो गई है। जिले में ऐसे 47 बच्चे चिह्नित कर उनके आवेदन भराए गए हैं। नगरीय क्षेत्र के बच्चों के आवेदन सत्यापित कराने के लिए एसडीएम के पास, जबकि ग्रामीण क्षेत्र के बच्चों के आवेदन खंड विकास अधिकारियों को भेज दिए गए हैं। सत्यापन पूरा होते ही शासन को रिपोर्ट भेज दी जाएगी। इससे अगले माह से इन अनाथ बच्चों को योजना के तहत चार हजार रुपये प्रति माह लाभ दिलाया जा सके।