नवाबगंज। मेहनत मजदूरी कर परिवार का भरण-पोषण करने वाले युवक का शव गांव के बाहर बाग में पेड़ पर शुक्रवार दोपहर को लटका मिला। इससे वहां ग्रामीणों की भीड़ लग गई। उसकी पत्नी भी रोती बिलखती हुई मौके पर पहुंच गई। उसने बताया कि पति की मानसिक स्थिति पूरी तरह ठीक नहीं थी। वह आर्थिक तंगी से भी परेशान थे। इसके चलते ही उसके पति ने फांसी लगा ली है।
थाना क्षेत्र के गांव हईपुर निवासी चुन्ने लाल (32) पुत्र भोजराज के पास खेती नहीं थी। वह पत्नी कमला देवी बेटी शलोनी(7), बेटे आयुष(4) के साथ झोपड़ी में रहता था। मेहनत मजदूरी कर परिवार का भरण-पोषण रकता था। दो वर्ष पूर्व सड़क दुर्घटना में वह घायल हो गया था। सिर में चोट होने से इलाज में उसका काफी पैसा खर्च हो गया था। दुर्घटना के बाद से वह ज्यादा मेहनत भी नहीं कर पा रहा था। इधर लॉकडाउन में काम भी नहीं मिल पा रहा था। इससे परिवार के सामने आर्थिक तंगी आ गई और चुन्ने परेशान रहने लगा। शुक्रवार दोपहर करीब 11.30 बजे चून्ने घर से निकला था। इसके करीब एक घंटे बाद बच्चों ने गांव के बाहर गांव वेग निवासी विनोद दीक्षित के आम के बाग में पेड़ पर लुंगी के फंदे से शव लटका देखा। जानकारी मिलने पर कमला बच्चों के साथ रोती बिलखती हुई मौके पर पहुंची। इस बीच मौके पर भीड़ लग गई। कमला ने बताया कि दुर्घटना के बाद से पति की मानसिक स्थिति भी पूरी तरह ठीक नहीं थी। शाम को उसने भोजन बनाया था। इसके बाद पति व बच्चों ने भोजन खाया। आर्थिक तंगी से भी पति परेशान रहते थे। घर में राशन के बारे में लोगों के पूछने पर कमला ने बताया कि घर में चावल हैं, पर आटा नहीं है। चुन्ने का एक भाई जोगराज है। उसकी भी आर्थिक स्थिति ठीक नहीं है। सीओ सोहराब आलम ने बताया कि चुन्ने की मानसिक स्थिति ठीक नहीं थी। इसके चलते ही उसने फांसी लगाकर जान दी है। परिजनों की सूचना पर शव का पोस्टमार्टम कराया जा रहा है।