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फर्रुखाबाद : लोहिया अस्पताल आना पंखा और मोमबत्ती साथ लाना

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लोहिया अस्पताल के आर्थो वार्ड में अंधेरे में लेटे मरीज व बैठे तीमारदार। संवाद - फोटो : FARRUKHABAD
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फर्रुखाबाद। डॉ. राममनोहर लोहिया अस्पताल में यदि भर्ती होकर इलाज कराना है, तो हाथ का पंखा और मोमबत्ती साथ लाना होगा। बिजली जाने के बाद रोशनी और पंखे चलाने को जेनरेटर तो लगे हैं, मगर यह चलते नहीं। लिहाजा मरीज और तीमारदार बेहाल रहते हैं। शनिवार की रात तीन घंटे बिजली गुल रही तो मरीज बरामदे में खड़े दिखे। अस्पताल में निर्बाध बिजली के लिए बना उपकेंद्र भी बेकार साबित हो रहा है।
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शनिवार दोपहर बाद आई आंधी और पानी के बाद कई क्षेत्रों की गुल बिजली देर रात तक बहाल हो सकी थी। लोहिया अस्पताल में बिजली गुल होने के बाद शाम ढलने पर भी जेनरेटर नहीं चलाया गया। रात आठ बजे के करीब आर्थो और जनरल वार्ड में अंधेरा घुप था।
कुछ मरीजों के तीमारदार मोबाइल की रोशनी जला रहे थे। कुछ हाथ के पंखे से हवा कर रहे थे। पैर में फैक्चर होने के बाद अस्पताल में पांच दिन से इलाज करवा रहे मरीज के रिश्तेदार पवन कुमार ने बताया कि तीन घंटे से बिजली गुल है।
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हर रात यही हाल होता है। गर्मी से बेहाल एक मरीज आर्थो वार्ड के बाहर निकलकर खड़े हो गए। नाम व पता पूछने पर नहीं बताया। कहा कि कोई सुनने वाला नहीं। आधी रात तक बमुश्किल दो घंटे भी बिजली नहीं चलती। जेनरेटर कभी नहीं चलाया जाता।
अस्पताल में निर्बाध बिजली देने के लिए वर्ष 2014 में एक विद्युत उपकेंद्र भी लगाया गया था। यह उपकेंद्र भी बेकार साबित हो रहा है। इससे कभी भी अस्पताल को लगातार बिजली नहीं मिल सकी। इससे मरीजों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
इमरजेंसी वार्ड के पुरुष वार्ड में छह पंखे लगे हैं। इनमें से तीन पंखे बंद और तीन चल रहे थे। 11 बेडों में नौ मरीज भर्ती थे। तीमारदार मरीजों पर पंखे से हवा कर रहे थे। इसी तरह महिला वार्ड में लगे चारों पंखे बंद थे। हालांकि इन वार्डों में इन्वर्टर से रोशनी हो रही थी।
रविवार को बिजली की अधिक कटौती हुई थी। जनरेटर नहीं चला इसकी किसी ने सूचना नहीं दी। मामले की जांच करवाएंगे। कोशिश रहेगी कि मरीजों को दिक्कत न हो।-डॉ. अजय कुमार, प्रभारी सीएमएस, लोहिया पुरुष अस्पताल।

लोहिया अस्पताल के आर्थो वार्ड के बाहर खड़ा मरीज। संवाद- फोटो : FARRUKHABAD

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