फ्लोराइसिस रोग से पीड़ित लालबहादुर
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गंगा नदी के दोनों छोरों पर बसे 170 मजरों का पानी खनिजों की अधिकता से जहरीला हो गया है। आयरन और फ्लोराइड की अधिकता से यहां के बाशिंदे फ्लोराइसिस रोग (हड्डी रोग) का शिकार हो रहे हैं। विश्व स्वास्थ्य संगठन के सर्वे में इसका खुलासा हुआ है।
गंगा किनारे बसे गांव चौरसिया निवासी लालबहादुर की रीढ़ की हड्डी 40 साल की उम्र में ही झुक गई है। फ्लोराइसिस नामक रोग ने उन्हें कमान की तरह बना दिया है। दौलतियापुर के इतबारीलाल, अवधेश और चपरा निवासी रतिराम, रामकिशुन व गोपाल भी हड्डी रोग से कराह रहे हैं।
परतापुर के गुड्डू, अंजू, राजेशनाथ हड्डी तिरछी होने से विकलांग हो चुके हैं। पानी में खनिज की अधिकता का एक असर यह भी होता है कि इस पानी से भरा बर्तन पीला पड़ जाता है। गांव करनपुरदत्त की लक्ष्मी ने खनिजों की अधिकता वाले पानी से भरे बर्तन भी दिखाए, जो पीले पड़ चुके थे।
जल निगम के अधिशासी अभियंता पंकज यादव के अनुसार यह संकट गंगा नदी के दोनों तरफ बसे 170 गांवों पर आया है। इनमें सबसे ज्यादा मजरे बढ़पुर विकासखंड यानी गंगा के इस तरफ के हैं और 80 मजरे विकासखंड राजेपुर यानी गंगा के उस तरफ के हैं। इन गांवों के पानी में खनिजों की अधिकता पाई गई है। यह रिपोर्ट विश्व स्वास्थ्य संगठन से जिला मुख्यालय को एक अप्रैल को मिली है।
मुख्य चिकित्साधिकारी डा. राकेश कुमार का कहना है कि फ्लोराइसिस एक गंभीर बीमारी है, जो पानी में फ्लोराइड की मात्रा अधिक होने पर पैदा होती है। इस बीमारी से दांत गिरने लगते हैं। रीढ़ की हड्डी तिरछी हो जाती है। शरीर के किसी भी अंग की हड्डी तिरछी होकर व्यक्ति को विकलांग बना देती है। गंगा नदी के किनारे बसे 170 मजरों में यह समस्या खड़ी हो गई है।