1000 और 500 के नोट बंद होने की चोट हर तबके के व्यक्ति पर पड़ी है। इसका सबसे ज्यादा असर ग्रामीण क्षेत्राें में देखने को मिल रहा है। किसानों के आलू बुवाई के लिए तैयार पड़े खेताें में पैसे के अभाव में घास जम आई है। असहाय रोगी गांव में ही बिना इलाज के तड़प रहे है।
हालात यह है कि अन्नदाता के ऊपर मुसीबतों का पहाड़ टूट पड़ा है। गांवों में लोगों का हालचाल लेने के लिए शनिवार को अमर उजाला टीम अलग-अलग गांवों में पहुंची। किस तरह से गांव वाले इस मुफलिसी के माहौल में जी रहे है। इस पर पेश लाइव रिपोर्ट:-
विकास खंड मोहम्मदाबाद के गांव दहेलिया में मैं अमर उजाला संवाददाता खड़ा हूं। यहां जमादार कुशवाहा (70) पैसे के अभाव में अपना इलाज नही करा रहे है। उसकी पुत्र वधू मोहिनी पत्नी सरवन का कहना है कि शुक्रवार को उसके ससुर की हालत इतनी बिगड़ गई कि उसकी बछिया पुजवा दी गई।
पैसा न होने के कारण वह इलाज के लिए नहीं जा सका। जमादार दमा रोग से पीड़ित है। बिना इलाज के वह 24 घंटे से जिंदगी और मौत से संघर्ष कर रहे हैं। इस गांव में नोट बंद होने का असर अधिकांश किसानों पर पड़ा है। बृंदावती पत्नी रामदास का आलू बुवाई के लिए तैयार किया गया चार बीघा खेत में घास जम आई है। उसका कहना है कि आर्यावर्त ग्रामीण बैंक मुरास में उसके पति का खाता है।
पैसे न निकल पाने की वजह से वह आलू का बीज नही गाड़ सकी। खेत में जमी घास को अपने हाथों से उखाड़ रही है। बृंदावती बताती है कि उसका बेटा पप्पू मानसिक रोगी है। इस वजह से पति पत्नी पैसे के लिए रिश्तेदारियों मे भी गए लेकिन पैसा नही मिल सका।
इसी गांव के रहने वाले बाबू कु शवाह सरवन कुशवाह सहित पचासों किसानों के खेतों में न तो बीज पड़ सका है और न आलू की गड़ाई हो रही है। गांव में न तो रोगियों के इलाज कराने के लिए पैसा बचा है। गांव वाले बताते है कि नोट बंद होने से पहले आलू गाड़ दिए।
उनके आलू जमकर खेतों में खड़े है लेकिन यूरिया खाद डालने के लिए उनके पास पैसा नही जिससे फसल खराब हो रही है। इस संबंध में भारतीय स्टेट बैंक शाखा फतेहगढ़ के वरिष्ठ प्रबंधक एसके पाठक से जब जानकारी की गई तो उन्होंने बताया कि बैंक की व्यवस्था ठीक होने में कितना समय लगेगा यह तो वह नही बता सकते लेकिन धीरे-धीरे गाड़ी पटरी पर आ रही है।
विकास खंड के गांव गंगाइच में मैं अमर उजाला प्रतिनिधि खड़ा हूं। यहां 500, 1000 के नोट बंद होने से किसान ट्रैक्टर से खेतों की जुताई करना भूल गया है। किसान जबर सिंह का कहना है कि 500 और 1000 रुपये के नोट ट्रैक्टर वाले नही ले रहे है।
मजबूरी में ेउसने बैलों से खेतों को जोतना शुरू कर दिया है। उसका कहना है कि नोट बंद होने के बाद आलू की गड़ाई नहीं कर पाया है। खेत जुताई के अलावा खाद , बीज डालने के लिए पैसे नही है। किसी तरह से अपनी जीविका चला रहा है। गांव निवासी जुम्मन सड़क हादसे में घायल हो गया था।
इलाज कराने के लिए पैसे नही है। उसके दोनो पैरों में फ्रैक्चर है। जुम्मन का कहना है कि उसके खेत खाद, बीज बिना सूने पड़े हैं। गांव निवासी किशोरी बेगम, अमरीखन बेगम और सितारा बेगम बताती है कि वह बीड़ी बनाकर अपने परिवार की बसर करती है।
उन्हें 1000 बीड़ी बनाने पर 60 रुपये और 1 किलो पत्ती काटने का 150 रुपये मिलता था। ब्रांच मालिक जबसे नोट बंद हुए है तब से नही दे रहे है। जिससे उसके घर में खाने के लाले पड़े हैं। गांव की कारचोभ कर रही हिना और हुमा का कहना है कि कारचोभ के काम करके वह अपनी पढ़ाई लिखाई करती है
ठेकेदार नोट बंद होने की बात कहकर पेमेंट नही कर रहा है, जिससे उनकी पढ़ाई चौपट हो रही है। वहीं, जावेद का कहना है कि वह बीमार चल रहा है। बड़े नोटाें की मार से घर का चूल्हा भी ठंडा सा पड़ गया है। गंगाइच गांव में कमोवेश यही हालात हर घर में है। एसबीआई के शाखा प्रबंधक हरीश भंडारी का कहना है कि शनिवार को वरिष्ठ नागरिक और खाताधारकों के लिए बैंक काम कर रही है।
कायमगंज। क्षेत्र के गांव किला मऊरशीदाबाद में मैं अमर उजाला प्रतिनिधि खड़ा हूं। यहां पर 500, 1000 का नोट बंद होने के बाद बैंकों से रुपये न मिलने से जहां किसानों की गृहस्थी डगमगाने लगी है वहीं खेती चौपट होने का डर भी सता रहा है।
खेत बुवाई के लिए तैयार है लेकिन सहकारी समितियों से खाद, बीज न मिलने से बुवाई नहीं हो पा रही है। गांव के रामचंद्र ने बताया कि उन्होंने 7 बीघा खेत में तंबाकू की फसल बोई है। जिसमें खाद, पानी लगना है।
सहकारी समितियों में खाद लेने गया तो 500 व 1000 का नोट लेने से मना कर दिया गया। समितियों के अधिकारियों ने कहा कि रिजर्व बैंक ने उन्हें बडे़ नोट लेने का कोई निर्देश नहीं दिया है। उन्होंने बताया कि 6 दिन बैंक के चक्कर काटने के बाद 2000 रुपये मिले हैं। गांव के दूसरे किसान रामदास ने बताया कि उन्होंने 5 बीघा खेत में तंबाकू की फसल बोई है। फसल में खाद, पानी लगना है।
पुराने नोटों से खाद नहीं मिल रही है। वहीं बैंक के अकाउंट में रुपये नहीं है। बैंक में रुपये जमा कराने के लिए लंबी लाइन में लगना पड़ रहा है। समझ में नही आ रहा कि खेती करें या बैैंक की लाइन में लगें। गांव के किसान रामसिंह ने बताया कि उसने नौ बीघा खेत में तंबाकू की फसल बोई है।
अन्य कार्य के लिए लगभग 40 हजार रुपये की और आवश्यकता है। सरकार ने बैंक से 25 हजार रुपये निकालने की ही छूट दी है। पुराने नोट न सोसाइटी ले रही है और न ही खाद विक्रेता तो खाद कहां से लाऊं । वहीं मजदूर भी पुराने नोट नहीं ले रहे हैं।
अताईपुर कोहना निवासी अरविंद शाक्य, अताईपुर कोहना निवासी शमशाद खां उर्फ नन्ना ने बताया कि पुराने नोटों से सोसाइटी खाद नहीं दे रही है जिससे समय पर खेतों में खाद पानी नहीं लग पा रहा हैं। उन्होंने कहा कि पिछले वर्ष सूखे ने बर्बाद कर दिया है। इस वर्ष नोट बंदी से बर्बादी की स्थिति पर लाकर खड़ा कर दिया है।
अमृतपुर। मैं अमर उजाला प्रतिनिधि इस समय राजेपुर के गांव गूजरपुर गहलवार में खड़ा हूं। यहां के किसान राजेंद्र कुमार अपने खेत में काम कर रहे हैं। बड़े नोट बंद होने के कारण खेती करने में दिक्कत आने संबंधी सवाल पर राजेंद्र ने बताया कि उसने थोड़े खेत में गेहूं की फसल की है।
अभी 10 बीघा खेत में गेहूं की बुवाई करनी है। इसके लिए डीजल, बीज, खाद की आवश्यकता है। 500 व 1000 रुपये के नोट बंद होने के कारण खाद और बीज नहीं मिल पा रहा है। कोई भी उधार देने को तैयार नहीं है। इस कारण अबकी बार परिवार को भुखमरी की कगार से गुजरना होगा।
इसी गांव के किसान मुलायम सिंह जो खेत में पर काम कर रहे है। उन्होंने बताया कि बंद हुए नोट न बदलने के कारण खेत की बुवाई नहीं हो पा रही है। तीन दिन बैंक मेें लाइन मेें खड़ा रहा लेकिन रुपये नहीं बदल सके। इसी गांव के रमाकांत का कहना है कि पांच बीघा खेत में गेहूं की फसल करनी है।
इसे लिए बीज, खाद की आवश्यकता है। 1000 व 500 के नोट न चलने के कारण कोई भी उधार नहीं दे रहा है। इस कारण बुवाई नहीं कर पा रहा हूं। इसी गांव के बबलू का कहना है कि खेत में आलू किया है। इसमें पानी लगाना है। नोट बंद होने के कारण खेत में पानी लगाने के लिए रुपये उधार नहीं मिल रहे है। ग्रामीण दीपचंद्र ने बताया कि मजदूर बंद हुए नोट नहीं ले रहे है। इस कारण खेत की बुवाई नहीं हो पा रही है।
शमसाबाद। विकास खंड के गांव उलियापुर में मैं अमर उजाला प्रतिनिधि खड़ा हूं। सूरजपाल अपने छह बीघा खेत में धान की फसल बांध रहे हैं। सूरजपाल से जब 500 व 1000 नोट बंद होने के बाद खेतीबाड़ी में आ रही दिक्कतों पर बातचीत की गई तो उन्होंने बताया कि नोटबंदी होने से खेत में पानी नहीं लग पा रहा है। इस वजह से अभी तक गेहूं की बुवाई शुरू नहीं कर सके हैं।
गृहस्थी का सामान भी नहीं खरीद पा रहे हैं। उधार लेकर जैसे-तैसे काम चला रहे हैं। अगर एक-दो माह यही हाल रहा तो रबी की फसल नहीं कर सकेंगे। इससे परिवार भुखमरी की कगार पर पहुंच जाएगा। किसान इनाम सिंह गन्ने के खेत में पानी लगाने के लिए पाइप बिछा रहे हैं।
इनाम सिंह ने बताया कि नोटबंदी से खाद और गेहूं का बीज नहीं खरीद पा रहे हैं। शुक्रवार को फैजबाग बाजार गेहूं का बीज लेने के लिए गए तो दुकानदार ने खुले पैसे लाने के लिए कहा। इस वजह से वह बगैर बीज खरीदे ही वापस लौट आए।
नवाबगंज। विकास खंड के गांव बरतल में मैं अमर उजाला प्रतिनिधि खड़ा हूं। खेत में काम कर रहे रामबाबू से नोटबंदी से होने वाली समस्याओं के बारे में पूछा तो उन्होंने बताया कि दो-तीन दिन से बैंक के चक्कर लगा रहा हूं लेकिन पैसा नहीं मिल पा रहा है।
इससे फसल को खासा नुकसान हो रहा है। उन्होंने बताया कि साहूकारों से उधार लेकर खाद बीज और पानी का इंतजाम कर रहा हूूं। ग्रामीण बैंक आफ आर्यावर्त के शाखा प्रबंधक अमित कुमार ने बताया कि उनकी बैंक की लिमिट 20 लाख रुपये है। 20 लाख कैश तीन दिन ही चल सका, जिससे भुगतान में समस्याएं आ रही हैं।