संवाद न्यूज एजेंसी
कायमगंज। यूरिया खाद की किल्लत होने से किसान इफको केंद्र के चक्कर काट रहे हैं। दानेदार यूरिया से नैनो यूरिया सस्ती होने के बावजूद किसान उस पर भरोसा नहीं जता रहे हैं। कुछ ही किसान नैनो यूरिया का इस्तेमाल कर रहे हैं। दो दिन से स्टॉक निल होने पर किसान इफको केंद्र के चक्कर काटकर वापस लौट रहे हैं।
शुक्रवार को कंपिल रोड स्थित इफको केंद्र पर ताला लटक रहा था। किसान यहां आकर सूचना पट देखकर वापस लौट रहे थे। डीएपी और यूरिया का स्टॉक निल की सूचना लिखी थी। साथ ही लिखा कि केंद्र प्रभारी फील्ड में नैनो यूरिया के बारे किसानों को जागरूक करने गए हैं। नैनो यूरिया के दाम 225 रुपये प्रति बोतल हैं, जबकि दानेदार यूरिया का बैग 266.50 का है। वहीं नैनो डीएपी 600 रुपये में है।
इसका बैग 1350 रुपये में मिल रहा है। दानेदार यूरिया व डीएपी के बैग से नैनो के दाम काफी कम होने के बावजूद किसान इसे इस्तेमाल नहीं कर रहे हैं। इसी वजह से दानेदार यूरिया की अक्सर किल्लत रहती है। इस सीजन में इफको केंद्र पर 250 बोतल नैनो यूरिया बिकी है, वहीं 2460 यूरिया के बैग बिके हैं। 30 बोतल डीएपी के बिके हैं। 3000 बोरी डीएपी बिकी हैं। फिलहाल इफको केंद्र पर दो दिन से न यूरिया है, और न ही डीएपी। जबकि केंद्र पर 1000 बोतल नैनो यूरिया का स्टॉक रखा है।
यहां किसान आ रहे हैं और खाद न मिलने पर चक्कर काटते हुए लौट रहे हैं। केंद्र पर खाद लेने आए गांव मुदौल निवासी रामनरेश राजपूत व गांव मदारपुर निवासी शिवम सूचना पढ़ रहे थे। पूछे जाने पर उन्होंने बताया कि नैनो सस्ती तो है मगर उसके लिए 2500 रुपये की स्प्रे मशीन खरीदना पड़ेगी। स्प्रे करने में दिक्कत आती है। हर किसान के खेत में पानी की सुविधा नहीं है। दूर से पानी लाना होता है। इससे किसान दानेदार खाद लगाना पसंद करते हैं।
इफको केंद्र प्रभारी सुधीर कुमार ने बताया कि दो दिन से खाद नहीं है। वह गांव भटासा में नैनो के बारे में किसानों को जागरूक कर रहे थे। उन्होंने बताया कि दानेदार खाद से नैनो फसल के लिए ज्यादा फायदेमंद है। इसके स्प्रे से सीधा पौधे की पत्तियों से जड़ को ताकत मिलती है। जमीन भी उपजाऊ रहती है। गांव भटासा में किसान राजीव सिंह गंगवार व अन्य कई किसानों को नैनो के इस्तेमाल के लिए प्रेरित किया। उन्होंने बताया कि खाद बोरी की डिमांड भेज दी गई है। दो तीन दिन में खाद का वितरण किया जाएगा।