फर्रुखाबाद। पिछले तीन माह से मजदूरी न मिलने से 70 हजार 249 मनरेगा मजदूरों के घर फाके की नौबत आ गई है। हालात यहे है कि इन मजदूरों को गांव के लोगों ने कर्ज भी देने से मना कर दिया है। जनवरी से अब तक का मनरेगा मजदूरों का चार करोड़ 98 लाख 27 हजार रुपया बकाया चल रहा है। प्रशासनिक अधिकारी बजट न होने की बात कहकर अपना पल्लू झाड़ रहे हैं, जबकि मनरेगा मजदूर अपनी मजदूरी प्राप्त करने के लिए अधिकारियों की ड्योढ़ी पर दस्तक दे रहे हैं।
जिले भर में लगभग एक लाख से अधिक मनरेगा जॉब कार्डधारक हैं। मौजूदा समय में जनवरी से अब तक 70 हजार 249 मजदूरों ने मनरेगा में काम किया। तीन माह से इन मजदूरों को मजदूरी के नाम से एक पैसा नहीं दिया गया। गांव बरझाला के रहने वाले मनरेगा मजदूर कैलाश कहांर, कनौजीलाल ने एसडीएम कायमगंज के समक्ष अपनी शिकायत दर्ज कराई कि उसे तीन माह से मनरेगा का पैसा न मिलने से घर में फांके हो रहे हैं।
एसडीएम अजीत कुमार सिंह ने बजट न होने की बात कहकर इन मजदूरों को चलता कर दिया। इस तरह से जिले भर के मनरेगा मजदूर पैसे के लिए परेशान हैं लेकिन मजदूरी नहीं मिल पा रही है। शासन की अनदेखी के चलते मनरेगा का छह करोड़ चार हजार रुपया बकाया पड़ा है। इसमें चार करोड़ 98 लाख 27 हजार रुपया मनरेगा मजदूरों का है और 1.94 लाख रुपया राजमिस्त्री आदि लोगों का है।
मैटेरियल का 99 लाख रुपया भी विभाग अदा नहीं कर सका है। मनरेगा का पैसा न मिलने से गांवों का विकास पूरी तरह से प्रभावित हो गया है। सभी गांवों में इस समय मनरेगा का कार्य ठप पड़ा है। मनरेगा मजदूर नेकराम राठौर निवासी कमालपुर का कहना है कि अब उसे गांववालों ने कर्ज देना भी बंद कर दिया है।
ऐसी हालत में परिवार की गुजर-बसर करना भारी पड़ रहा है। मनरेगा परियोजना निदेशक डॉ. डीआर विश्वकर्मा ने बताया कि मनरेगा मजदूरों की बेबसी और लाचारी को देखकर कई बार शासन से बजट की मांग की गई है। लेकिन अभी तक इनकी मजदूरी और मैटेरियल का कोई भी पैसा प्राप्त नहीं हुआ है। शासन से बजट मिलने पर ही भुगतान संभव है। तब तक भुगतान कर पाना प्रशासन की बस की बात नहीं है।