श्रीरामनगरिया मेला में कवि सम्मेलन में काव्य पाठ करते डा. शिवओम अंबर।
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हाथरस से आए डा. विष्णु सक्सेना ने युवाओं को झकझोरते हुए कविता सुनाई कि बनेगी बात नई सोच बदलकर देखो, रहो कहीं भी मगर ख्वाब महल के देखो...। पदम अलबेला ने राम नगरिया राम की श्री गंगा का घाट, अद्भुत मेला लग रहा देखो बड़ा विराट... सुनाकर कल्पवासियों का ध्यान आकृष्ट किया। मथुरा से आए राधा गोविंद पांडेय ने गोरी जो मुस्काए तो फागुन आ जाए, चंदा जो शरमाए तो फागुन आ जाए सुनाकर लोगों को लोटपोट कर दिया।
कानपुर से आईं शबीना अदीब ने भारत का हर वासी कोई विस्मिल कोई टीपू है, भारत माता के दुश्मन को बातें यह समझानी हैं सुनाकर गंगा-जमुनी तहजीब का मुशायरा पेश किया। कार्यक्रम का संचालन कर रहे डा. शिवओम अंबर ने भी रचनाएं सुनाईं। इस अवसर पर मेला सचिव सिटी मजिस्ट्रेट शिवबहादुर सिंह, मेला व्यवस्थापक संदीप दीक्षित, एसओ महेंद्र त्रिपाठी, अवनीश दीक्षित, हरिओम और सुधाकर मिश्र आदि मौजूद रहे।
वहीं आर्य प्रतिनिधि सभा की ओर से कवि सम्मेलन में कवियों ने राष्ट्रभक्ति, श्रृंगार, ओज रस से भरी कविताएं पढ़ीं। डा. कृष्णकांत अक्षर ने देश की माटी तेरी सौगंध खाते हैं हम, प्राण तेरे लिए देंगे तुझ में ही मिल जाएंगे हम। हापुड़ से आए डा. अनिल बाजपेई ने सितारा एक टूटे तो गगन खाली नहीं होता, गीता भारद्वाज ने घुटन सासों की परिवारों की जिम्मेदारियां हम हैं सुनाया। इस दौरान आचार्य चंद्रदेव शास्त्री, डा. अजय यादव, प्रदीप यादव, धर्मवीर, संजय, मुन्ना यादव और रामचंद्र आर्य आदि मौजूद रहे।