वृद्धा आश्रम में बिलों को चेक करते टीम के सदस्य। संवाद
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मोहम्दाबाद। गांव अलावलपुर में संचालित वृद्धाश्रम में शुक्रवार को कमेटी ने जांच की तो वहां एक्सपायरी दवाएं मिलीं। पंजीकृत 70 में से 52 बुजुर्ग ही मौके पर थे। बुजुर्गों ने बताया कि उन्हें न तो मंजन दिया जाता और न ही तेल। मनोरंजन के नाम पर एक अखबार व दो किताबें ही रखी मिलीं, जबकि दो माह का खर्च 13 हजार 450 रुपये दिखाया गया था।
अलावलपुर स्थित वृद्धाश्रम के दो माह के बिल में फर्जीवाड़े की आशंका पर जिलाधिकारी ने जांच कमेटी गठित की थी। शुक्रवार को कमेटी जांच करने पहुंची तो वृद्धाश्रम में अव्यवस्थाओं की पोल खुल गई। बुजुर्गों ने बताया की महीने में एक बार ही नाई बुलाया जाता है। मनोरंजन के नाम पर रामायण व शिवपुराण की पुस्तक के साथ एक ढोलक, हारमोनियम व मजीरा दिया गया है।
इस पर जिला समाज कल्याण अधिकारी राजीव लोचन मिश्रा ने अधीक्षक को फटकार लगाई। एसीएमओ डॉ. उमेश चंद्र वर्मा ने दवाइयों का स्टाक देखा तो बीटाडिन व फोलिक एसिड की दवाएं एक्सपायर मिलीं। सरकारी व निजी खरीद से जुड़ीं दवाएं एक ही रजिस्टर पर चढ़ी थीं। रखरखाव भी ठीक नहीं मिला।
टीवी व कंप्यूटर खराब था। पता चला कि जेनरेटर कभी चलाया ही नहीं जाता, जबकि 15 हजार रुपये का बिल हर माह लगाया जा रहा है। शौचालय की छत टूटी थी। 24 घंटे ड्यूटी वाले कर्मचारी गैरहाजिर मिले। बुजुर्गों ने स्टोर कीपर राजेश पर अभद्रता का आरोप लगाकर शिकायत की। बुजुर्गों के कमरे गंदे थे। बुजुर्गों ने बताया कि सही बात कहने पर उन्हें धमकाया जाता है।
कमेटी के सदस्य अधिवक्ता दीपक द्विवेदी ने इस पर नाराजगी जताई। महिलाओं के शौचालय भी गंदे थे। पास में ही कचरे के ढेर मिले। तीन रसोइयों ने जनवरी से अब तक सात महीने का मानदेय न मिलने की शिकायत की। वृद्धाश्रम के अधीक्षक मयंक मौजूद रहे। अधिवक्ता दीपक द्विवेदी ने बताया कि वृद्धाश्रम में काफी गड़बड़ी मिली हैं। वह जांच रिपोर्ट जिलाधिकारी को सौंपेंगे।