हरी सब्जियों की महंगाई ने रसोई का बजट बिगाड़ दिया है। महज एक सप्ताह में सब्जियों के दाम आसमान पर पहुंच गए हैं। मंडियों में इनके दाम कम हैं, लेकिन फुटकर विक्रेता लगभग दोगुनी कीमत में इनको बाजारों में बेच रहे हैं।
टमाटर के दाम पिछले दो महीने से 15 से 20 रुपये किलो थे। अब यह 40 से 50 रुपये बिक रहा है, जबकि लौकी 30 रुपये किलो मिल रही है। आढ़ती संजय सक्सेना ने बताया कि कुछ दिनों में टमाटर बाहर से आने लगेगा तब इसके दाम में कुछ कमी आ सकती है। भिंडी, अरबी, कद्दू, टिंडा और तोरई जैसी सीजनल सब्जियां 30-40 रुपये किलो पर बिक रहीं हैं। प्याज के दाम भी 20 से 25 रुपये किलो पर स्थिर हैं। आलू ने मार्च से ही तेजी पकड़ी हुई है। सब्जियों के दाम में उछाल आने से घर का खर्चा 400 से 800 रुपये बढ़ गया है।
इस बार आलू हो गया राजा
आलू किसानों के लिए बीता साल बेहद खराब था। पूरे साल कोल्ड स्टोरेज से निकला आलू 10 रुपये किलो बना रहा, जबकि इस साल होली से पहले ही आलू की कीमतों में उछाल आ गया था। थोक में आलू के 50 किलो के बोरे का रेट 600 रुपये है। यानी कि थोक भाव 12 रुपये किलो। ऐसे में फुटकर विक्रेता लगभग दो दोगुने दाम वसूल रहे हैं। इससे उन्हें मोटा मुनाफा हो रहा है। आलू के थोक विक्रेता नरेश शाक्य बताते हैं कि आलू और प्याज के दाम मामूली बढ़ते घटते हैं। लेकिन फुटकर में इसका असर दिखता है। आढ़त मंडी और लेबर का खर्च निकालने के बाद दाम तय किए जाते हैं।