भगवान भोलेनाथ की जटाओं से निकली गंगा मुक्ति के साधन
के साथ जीवन भी प्रदान कर रही हैं। दूसरी काशी के नाम से प्रसिद्ध
फर्रुखाबाद जनपद में रामनगरिया वैदिक संस्कृति और पौराणिक आस्था को समेटे
है।
यहां संत, महात्मा और कल्पवासी माघ मास के पुण्य से लाभान्वित
हो रहे हैं। ये लोगों को सामाजिक समरसता का पाठ भी पढ़ा रहे हैं। वैदिक
क्षेत्र चरित्र निर्माण पर जोर दे रहा है तो धार्मिक अनुष्ठान परसेवा के
प्रति लोगों को प्रेरित कर रहे हैं।
कल्पवासियों की साधना अंतिम
दौर में है। जिस तरह लोगों ने भीषण सर्दी में गंगातट पर रहते हुए कठिन
परीक्षा दी है, उससे उन्हें कल्याण की पूर्ण आशा है तो वहीं सांस्कृतिक
क्षेत्र में कवि सम्मेलन, महिला सम्मेलन के माध्यम से लोगों को जागरूक रहने
का संदेश दिया गया। साथ ही कृषकों के लिए आयोजित कृषि गोष्ठी में किसानों
को जैविक खादों के प्रयोग करने पर बल दिया गया।