फर्रुखाबाद। दो सौ रुपये मासिक वाहन भत्ते से शासन पुलिस के बीट सिस्टम को मजबूत करने में जुटा है। पुलिसकर्मियों की फिटनेस ठीक करने के लिए 25 रुपये एक वक्त के खाने के लिए दिए जा रहे हैं। ड्रेस अच्छी हो इसलिए 188 रुपये धुलाई के लिए मिल रहे हैं। शासन से आने वाली बाइकों को थानों पर न देकर साहब के बंगले व आफिसों के कर्मचारियों को दे दिया गया है। वे सरकारी पेट्रोल से घर व आफिस आते-जाते हैं।
थाने में तैनात सिपाही के कंधे पर अपराधियों की निगरानी, समन तामील, विवाद निस्तारण, बीट के गांवों के भ्रमण की जिम्मेदारी है। इसके लिए शासन दो सौ रुपये का वाहन भत्ता हर माह देता था। पहले पुलिसकर्मी साइकिल से चलते थे तो यह भत्ता ठीक था। लेकिन अब एक बीट के सिपाही को प्रतिदिन चालीस से लेकर पचास किलोमीटर की दूरी तय करनी होती है। तो उसको मिलने वाला दो सौ रुपये का भत्ता महज पांच दिन में ही खत्म हो जाता है। शहर के थानों में सरकारी बाइकें अधिक हैं। इन बाइकों को विभाग एक लीटर पेट्रोल प्रतिदिन व रात के हिसाब से दिया जाता है। लेकिन ग्रामीण क्षेत्र के थानों में सिपाही निजी बाइकों से ही दूरी तय करते हैं। वह हर महीने 12 सौ किलोमीटर बाइक चलाते हैं। शासन सिपाहियों की फिटनेस को मजबूत करने के लिए 25 रुपये एक वक्त के खाने के लिए देती है। इतने रुपये में सुबह का नाश्ता ही संभव नहीं है। अधिकारियों की मंशा है कि सिपाही साफ सुथरी वर्दी पहने उसके लिए महज 188 रुपये धुलाई का भत्ता मिलता है। जो कि चार बार की धुलाई में ही खत्म हो जाता है। शासन से थानों के लिए भेजी गई नई बाइकें साहब के स्टेनो, वरिष्ठ लिपिक, हेड पेशी, आरआई के मुंशी इस्तेमाल कर रहे हैं। उसमें सरकारी पेट्राल भी पड़ रहा है और वह दो सौ रुपये भत्ता भी जेब में रख रहे हैं।