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Farrukhabad News: हर ओर दिख रहा धर्म, संस्कृति व आस्था का संगम

Sun, 11 Jan 2026 12:36 AM IST
कानपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, फर्रूखाबाद
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फोटो-24 मेला रामनग​रिया में गंगा पूजन करती महिलाएं। संवाद
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फर्रुखाबाद /अमृतपुर। गंगा की पावन रेती पर बसी तंबुओं की नगरी इन दिनों धर्म, संस्कृति और आस्था के सुंदर संगम का प्रतीक बन गई है। शनिवार सुबह से खिली धूप तो कल्पवासियों की श्रद्धा और दमकने लगी। रामधुन बढ़ने के साथ मेले में चहल-पहल भी बढ़ गई। श्रद्धालु नियम, संयम और साधना के साथ कल्पवास कर रहे हैं। ठंड से राहत देती धूप में गंगा स्नान के बाद पूजा-अर्चना, जप-तप और दान-पुण्य का क्रम पूरे श्रद्धाभाव से चलता दिखाई दे रहा है ।
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पांचाल घाट गंगा तट पर प्रयागराज की तरह बसी तंबुओं की नगरी में धर्म, संस्कृति और आस्था की धारा बह रही है। संतों के प्रवचन, भजन-कीर्तन और सांस्कृतिक कार्यक्रम वातावरण को आध्यात्मिक ऊर्जा से भर रहे हैं। आस्था की इस अस्थायी नगरी में जहां एक ओर सनातन परंपराओं की गूंज है, वहीं दूसरी ओर विकास की झलक भी साफ नजर आती है। गंगा तट पर सजी यह तंबू नगरी श्रद्धा, संस्कृति और सुशासन का जीवंत उदाहरण बनकर श्रद्धालुओं को नई अनुभूति दे रही है।

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फोटो-26 धूप में जटाओं को फैलाए बैठे संत रामदास त्यागी। संवाद
सात फीट लंबी जटाएं बनीं पहचान, भक्ति में रमे मौनी बाबा

संवाद न्यूज एजेंसी

अमृतपुर। पांचाल घाट के पावन तट पर गंगा पुल के नीचे बने आश्रम आस्था और त्याग की अद्भुत मिसाल पेश कर रहे है। फिरोजाबाद जिले से आए संत रामदास त्यागी को श्रद्धालु टाटमबरी बाबा और मौनी संत के नाम से जानते हैं। वह इन दिनों गंगा तट पर भक्ति और सेवा में लीन हैं। संत बताते हैं कि 11 साल की उम्र में हनुमान जी कृपा से भगवान की भक्ति में रम गए और संत बालाराम दास महाराज के सानिध्य में पहुंच गए। सांसारिक मोह-माया का त्याग कर दिया और तभी से त्यागी बाबा के नाम से जाने जाते हैं।
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बाबा कहते है कि गुरु के परलोक जाने के बाद जटाएं कटवाई थीं। वर्तमान में उनकी जटाएं 20 वर्ष की है। जिनकी लंबाई करीब सात फीट है। बाबा ने 14 वर्षों तक मौन धारण कर तप किया। इसी कारण वह मौनी संत के नाम से भी प्रसिद्ध हैं। धूप खिलने से संत अपनी कुटिया से बाहर आकर धूप में जटाओं को फैलाकर बैठे थे। सात फीट की जटाएं आकर्षण का केंद्र बनी हुई हैं। बाबा कहते कि धूनी लगाकर बालों का जटा बनाया जाता है।

फोटो-24 मेला रामनगरिया में गंगा पूजन करती महिलाएं। संवाद

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