ईद मिलाद उन नबी का जश्न मनाया
फर्रुखाबाद। पैगंबर मोहम्मद साहब के जन्म दिवस ईद-मिलाद उन नबी का जश्न शुक्रवार को मनाया गया। घरों में कुरानख्वानी हुई। बच्चों ने हाथों में परचम लेकर गलियों में लहराए। घरों में पकवान बनाए गए। तमाम लोगों ने घरों में पैगंबर को याद किया।
पैगंबर के जन्म दिवस पर घरों में खास इंतजाम किए गए थे। घरों में सुबह से ही कुरानख्वानी, कुरआन की तिलावत और इबादत की गई। इस साल कोरोना महामारी की वजह से प्रशासन ने जुलूस की इजाजत नहीं दी थी जबकि जलसा आयोजकों ने खुद निरस्त कर दिया था। मोहल्लों में बच्चे हाथों में परचम लेकर घूमते रहेे।
98 साल बाद पहली बार नहीं उठा जुलूस
पैगंबर मोहम्मद के जन्मदिन समारोह के आयोजन के लिए 1922 में सीरत कमेटी का गठन किया गया था। तभी से ईद-मिलाद उन नबी पर जुलूस और जलसे का आयोजन कमेटी ही करती आई है। कोरोना से बचाव के लिए जुलूस की प्रशासन ने अनुमति नहीं दी थी। कई सावधानियों का अनुपालन करते हुए जलसा करने को डीएम ने अनुमति दे दी थी।
आपसी सामंजस्य के अभाव में आयोजन कमेटी के पदाधिकारियों ने जलसा करने से भी हाथ खींच लिए। इससे कौम के लोगों में मायूसी नजर आई। हर साल सीरत कमेटी निजी और सरकारी अस्पतालों में फल का वितरित करती थी, मगर इस बार फल वितरण कार्यक्रम भी नहीं किया गया।
चीनीग्रान में बच्चों ने किया दीनी मुकाबला
चीनीग्रान मोहल्ले में हर साल सीरत कमेटी दीनी मुकाबला कराती थी। कमेटी ने हाथ खींचे, तो बच्चों ने अपने परिजनों से चंदा एकत्रित करके दीनी मुकाबले का आयोजन किया। इसमें दीन से संबंधी प्रश्नों के उत्तर पूछे गए। आयोजन में सलमान, जमन खुर्शीद, अनन्ता खुर्शीद, अबूजर, अमन, निहाल आदि मौजूद रहेे।
रोजगार से जोड़ने को गरीब महिलाओं को दीं सिलाई मशीनें
मुस्लिम जकात फाउंडेशन ने ईद-मिलाद उन नबी पर गरीब महिलाओं को रोजगार से जोड़ने की मंशा से सिलाई की मशीनें भेंट कीं। भूसा मंडी स्थित निवास पर अध्यक्ष मजहर मोहम्मद खां, सेक्रेटरी रिजवान ताज, कोषाध्यक्ष हाजी अल्लादीन, मोहम्मद खालिद, मोहम्मद यूनुस अंसारी, डॉ. शाकिर अली मंसूरी, रिजवान अहमद आदि की देखरेख में आयोजन हुआ। वक्ताओं ने कहा, भूखे को खाना खिलाना सबसे नेक काम है। कहा कि इसी मंशा से फाउंडेेशन हर साल गरीबों को रोजगार देने की दिशा में काम करती है। आगे भी गरीबों की हर संभव मदद की जाएगी।
दरगाह हुसैनिया मुजीबिया में जलसा
हिंदू-मुस्लिम एकता की मिसाल दरगाह हुसैनिया मुजीबिया में जलसा हुआ। यहां सज्जादानशीन शाह फसीह मुजीबी ने कहा, हजरत मोहम्मद ने भेदभाव, ऊंच-नीच मिटाने का पैगाम दिया। वह किसी खास कौम और समुदाय के लिए रहमत बनकर नहीं आए, बल्कि उनका पैगाम तमाम इंसानों के लिए है।
उन्होंने लोगों से कहा कि एक दूसरे की इज्जत करो। इस मौके पर मौलाना ग़ुलाम सुब्हानी चिश्ती अजहरी, हिलाल मुजीबी, क़ाजी सय्यद मुताहिर अली, तनवीर रजा, हाफिज सय्यद मुहम्मद हारून ने नात शरीफ पढ़ी ।