फर्रुखाबाद। रामनगरिया में कल्पवासियों को स्वच्छ गंगा जल मिले इसी की मंशा से लागू की गई बंदी मजाक बनकर रह गई है। धूप खिलते ही कपड़ों की रंगाई और छपाई शुरू कर दी गई। नाले-नालियां प्रदूषित रंगीन पानी से भरी दिखीं। बंदी को सख्ती से लागू करने की मंशा से बनी प्रदूषण विभाग की टीम नदारद दिखी।
25 जनवरी को पौष पूर्णिमा पर गंगा में मुख्य स्नान है। इस दिन स्वच्छ जल उपलब्ध कराने की मंशा से कोर्ट के आदेश पर शासन ने 20 से 22 और 25 जनवरी को शहर के सभी छपाई कारखाने, रंगीन पानी निकालने वाले प्रतिष्ठानों और नालों को बंद रखने के निर्देश दिए थे। यही नहीं बंदी का सख्ती से पालन कराने की मंशा से डीएम ने नगर मजिस्ट्रेट, प्रदूषण विभाग के सहायक पर्यावरण अभियंता अंकित कुमार मिश्र, जेएलए प्रसून पाल, गंगा प्रदूषण नियंत्रण इकाई के सुपरवाइजर डीसी दीक्षित की टीम बनाई थी।
20 जनवरी से बंदी शुरू होने के बाद अधिकारी शहर में नजर नहीं आए। दो दिन बादल होने की वजह से कपड़ा छपाई प्रतिष्ठान बंद रहे। 22 जनवरी मंगलवार सुबह 10 बजे से ही सूर्य देव के दर्शन हुए। कुछ देर में धूप खिल गई। धूप का फायदा उठाते हुए कारखानों में कपड़ा छपाई की गई।
यही नहीं नखास, साहबगंज चौराहा, कादरीगेट पजावा आदि में कपड़ों की रंगाई की गई। कपड़ा रंगाई का काम इतना अधिक किया गया कि काफी दूर तक नाले-नालियों में रंगीन पानी बहता रहा।
एई ने नहीं उठाया फोन, जेएलए बोले- अभी कानपुर के लिए निकले हैं
प्रदूषण विभाग के सहायक पर्यावरण अभियंता अंकित कुमार मिश्र ने फोन रिसीव नहीं किया। प्रदूषण विभाग के जूनियर लैब असिस्टेंट प्रसून पाल ने शाम पौने पांच बजे बताया कि वे अभी निकले हैं। उन्हें कपड़ा रंगाई- छपाई की जानकारी नहीं हुई। अगली बार देखेंगे।
शहर खुशी मनाते लोग । संवाद
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