फर्रुखाबाद। स्वतंत्रता संग्राम सेनानी डॉ. हरिश्चंद्र चतुर्वेदी का मंगलवार को निधन हो गया। वह 96 वर्ष के थे। अमृतपुर एसडीएम ने उन्हें राष्ट्रीय ध्वज समर्पित किया। तहसीलदार सदर व अपर जिलाधिकारी ने पुष्पांजलि अर्पित कर आजादी के इस परवाने को अंतिम विदाई दी। गार्ड ऑफ ऑनर न मिलने की वजह से परिजनों में रोष रहा।
स्वतंत्रता संग्राम सेनानी डा. हरिश्चंद्र का जन्म 20 फरवरी 1920 को गांव मंझना तहसील कायमगंज में हुआ था। वर्ष 1941 में काशी हिंदू विश्वविद्यालय बनारस से डॉक्ट्रेट की पढ़ाई छोड़कर डॉ. हरिश्चंद्र चतुर्वेदी आजादी की लड़ाई में उतरे।
6 नवंबर 1942 को पहली बार डॉ. हरिश्चंद्र चतुर्वेदी को कायमगंज रेलवे स्टेशन पर गिरफ्तार किया गया। इसके बाद वह 30 जनवरी 1943 से लेकर 27 अगस्त 1943 तक आजादी की लड़ाई को लेकर जेल में बंद रहे।
सुभाषचंद्र बोस, पंडित जवाहरलाल नेहरू और राजनरायन उनके सहपाठी रहे। अंग्रेजों ने उन्हें करीब सात माह की सश्रम कारावास की सजा दी थी। देश को आजादी मिलने के बाद डॉ. हरिश्चंद्र चतुर्वेदी को तांब्रपत्र देकर सम्मानित भी किया गया।
उनकी पत्नी राजवती देवी और पुत्र पुष्कर चतुर्वेदी का निधन हो चुका है। परिवार में ज्येष्ठ पुत्र सुधाकर चतुर्वेदी, राजीव चतुर्वेदी, आनंदकर चतुर्वेदी, संजीव चतुर्वेदी, पुत्री निर्मला, अर्चना हैं। इन दिनों वह बिछिवा वाली कोठी नेहरू रोड स्थित आवास पर रह रहे थे।
डा. हरिश्चंद्र चतुर्वेदी करीब पांच-छह साल से मानसिक और ह्रदय रोग से पीड़ित चल रहे थे। बीमारी के चलते मंगलवार रात डा. हरिश्चंद्र चतुर्वेदी का निधन हो गया। स्वतंत्रता संग्राम सेनानी की शवयात्रा में काफी संख्या में लोगों की भीड़ उमड़ी।
शव यात्रा पांचाल घाट स्थित शमशान घाट पर पहुंची। यहां विधि-विधान के साथ उनके शव को मुखाग्नि ज्येष्ठ पुत्र सुधाकर चतुर्वेदी ने दी। इस अवसर पर सदर विधायक विजय सिंह, संजय गर्ग, अरुण प्रकाश तिवारी, पंकज मिश्र, संजीव मिश्र, मनोज मिश्र, पूरनचंद्र मिश्र, विक्की सरदार, बल्लू पांडेय, सरल दुबे और आलोक मिश्र आदि मौजूद रहे।