फर्रुखाबाद। बस में जहरखुरान गिरोह के शिकार एक यात्री को चालक-परिचालक बस में बैठाकर लोहिया अस्पताल ले गए। वहां भर्ती कर इलाज करने के बजाय डॉक्टर ने पुलिस के पास ले जाने की बात कह दी। चालक-परिचालक उसे आवास विकास चौकी ले गए, तो वहां से भी टरका दिया गया। एक घंटे बाद परेशान होकर बस के स्टाफ ने उसे रोडवेज बस अड्डा पर छोड़ दिया। यात्री गिरता और उठता रहा। गार्डों ने उसे प्रतीक्षालय में बैठाया मगर वह बार-बार चलने का प्रयास करता रहा।
आगरा के फाउंड्रीनगर डिपो की बस से एक यात्री फर्रुखाबाद के लिए सवार हुआ। रास्ते में जहरखुरान गिरोह ने शिकार बना लिया। सुबह करीब 11 बजे वह बस अड्डा पर जब सीट से नहीं उठा, तो चालक कमलेश कुमार और परिचालक प्रमोद कुमार ने उसे नीचे उतारने का प्रयास किया। उसी समय बस अड्डा पर ड्यूटी कर रहे एसके शुक्ला की नजर पड़ी, तो उन्होंने चालक-परिचालकों को बस अड्डा के गार्ड पुष्पेंद्र कुमार के साथ बस से लोहिया अस्पताल भेज दिया।
चालक-परिचालक जब उसे लोहिया अस्पताल लेकर पहुंचे, तो ड्यूटी डॉक्टर ने भर्ती कर इलाज करने के बजाय पहले पुलिस के पास ले जाने की बात कह दी। चालक-परिचालक ने यात्री को दोबारा बस में बैठाया। वह आवास विकास चौकी पहुंचे। वहां पुलिस कर्मी ने यात्री की जेबों की तलाशी ली, मगर कुछ नहीं मिला। उन्होंने बस के स्टाफ को अस्पताल में भर्ती कराने की बजाय टरका दिया। परेशान होकर स्टाफ ने उसे फिर बस में बैठाया और बस अड्डा पर छोड़ दिया।
परिचालक प्रमोद ने बताया कि वह बस लेकर एक घंटे तक घूमता रहा, न तो अस्पताल में भर्ती किया गया और न ही पुलिस ने उसका इलाज कराने की जरूरत समझी। मजबूरन उसे बस अड्डा पर छोड़ना पड़ा। बेसुध होने की वजह से वह गिरता और चलता रहा। काफी पूछने पर टूटी-फूटी आवाज में उसने अपना नाम रामजी पुत्र परशुराम निवासी पांचाल घाट बताया। सीएमएस डॉ. राजकुमार गुप्त ने बताया कि उसे भर्ती कर इलाज करना चाहिए था। वह इस मामले को दिखवाएंगे। इंस्पेक्टर विनोद शुक्ल ने बताया कि चालक-परिचालक को बस अड्डा के जिम्मेदारों को संज्ञान में लेकर थाना प्रभारी को बताना चाहिए। उन्हें ऐसी सूचना नहीं दी गई। वह यात्री की खोजबीन करके समुचित इलाज करवाने की व्यवस्था करेंगे।