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डीएनए रिपोर्ट ने खोल दी पोल

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जनपद एटा के ग्रामीण का वर्ष 2011 में अपहरण हो गया था। इसके बाद मेरापुर में मिला नर कंकाल उसका बताया गया। शिनाख्त के लिए नर कंकाल की हड्डियों व ग्रामीण के बेटे के खून का नमूना लेकर डीएनए टेस्ट कराया गया।
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इसमें दोनों का डीएनए भिन्न पाया गया। पर पुलिस ने इससे पहले ही एक आरोपी को अपहरण कर हत्या करने के आरोप में गिरफ्तार कर जेल भेज दिया। तीन आरोपियों के खिलाफ कुर्की की कार्रवाई कर दी। इसके बाद भी पुलिस 31 अगस्त 2019 को मुकदमे में चार्जशीट दाखिल कर सकी है। ऐसे में पुलिस की कार्रवाई पर सवालिया निशान लग रहे हैं।
जनपद एटा थाना अलीगंज के गांव फर्दपुरा निवासी कृपाल सिंह का अपहरण हो गया था। एक नर कंकाल मेरापुर के खेत में मिला था। पुलिस का दावा था कि यह कंकाल कृपाल सिंह का है।
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उनके बेटे उमेश चंद्र से उसकी शिनाख्त कराने का प्रयास किया गया। पर सफलता नहीं मिली। इसके बाद भी पुलिस ने कृपाल सिंह के पुत्र उमेश चंद्र की तहरीर पर अज्ञात के खिलाफ मेरापुर थाने में 14 अगस्त 2011 को अपहरण व हत्या की धाराओं में मुकदमा दर्ज कर लिया था।
नर कंकाल का पुलिस ने पोस्टमार्टम कराया। डीएनए टेस्ट के लिए उसकी हड्डियां सुरक्षित कर ली गईं। इधर हड्डियों से मिलान के लिए उमेश चंद्र के खून का नमूना लेकर डीएनए टेस्ट को भेजा गया। डीएनए रिपोर्ट आने में समय लगा। जब डीएनए टेस्ट की रिपोर्ट आई तो हड्डियों का उमेश चंद्र के डीएनए से मिलान नहीं हो सका।
इसी बीच पुलिस ने विवेचना में प्रकाश में आए रामआसरे उर्फ पप्पू निवासी फर्दपुरा थाना अलीगंज जिला एटा को कृपाल सिंह की हत्या में 3 अगस्त 2013 को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया।
विवेचना में जनपद एटा थाना नयागांव के गांव सिमरा निवासी रजिस्टर सिंह, सुखराम, फर्दपुरा के बलराम के नाम भी हत्या व अपहरण में प्रकाश में आए। पुलिस ने इनके खिलाफ 5 जनवरी 2016 को कुर्की की कार्रवाई कर दी।
मुकदमा अभी विचाराधीन है। विवेचक ने 31 अगस्त 2019 को चार्जशीट दाखिल कर दी। पर आंशिक विवेचना जारी रखी। अभियोजन की राय को लेकर मामला लंबित पड़ा है। ऐसे में जब डीएनए से मिलान नहीं हो पाया तो आरोपी को किस आधार पर पुलिस ने जेल भेज दिया।
15 विवेचकों ने की अपहरण कर हत्या के मुकदमे की जांच
आठ वर्ष पहले हुए कृपाल सिंह के अपहरण व हत्या के मामले में मेरापुर के तत्कालीन एसओ महिपत सिंह, मुकेश यादव, रामजीवन यादव, एफएस जाफरी, सालिगराम वर्मा, केवी सिंह, मोहम्मद आसिफ, संजय कुमार गुप्ता, सुशील कुमार सिंह, राज बहादुर सिंह, देवेंद्र कुमार, सुदीप मिश्रा, महेंद्र कुमार त्रिपाठी समेत 15 विवेचकों ने जांच की है। तब जाकर कहीं पुलिस ने आंशिक चार्जशीट दाखिल हो सकी है।
आरोपियों को मिलेगा लाभ, फंसेंगे विवेचक
वरिष्ठ अधिवक्ता महेश यादव का कहना है कि जब पुलिस ने बरामद किए नर कंकाल व कृपाल सिंह के बेटे के डीएनए टेस्ट कराया और दोनों की रिपोर्ट भिन्न आई। ऐसे में पूरी विवेचना ही गलत हो गई है। जिन लोगों को मुकदमे में आरोपी बनाया गया है। उनको भी राहत मिल जाएगी और विवेचना करने वाले दरोगा पर कार्रवाई होनी चाहिए। पुलिस को नए सिरे से विवेचना करनी होगी। सवाल है कि आखिर कृपाल सिंह कहां हैं। उनका अपहरण कर हत्या की गई तो शव कहां गया। यह पुलिस को पता लगाना होगा।
‘डीएनए रिपोर्ट भिन्न आने के बाद अभियोजन अधिकारी से मुकदमे के संदर्भ में लिखित राय मांगी गई है। इसकी रिपोर्ट अभी आई नहीं है। रिपोर्ट आने के बाद कार्रवाई की जाएगी।’
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डॉ. अनिल मिश्रा, पुलिस अधीक्षक फर्रुखाबाद
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