फर्रुखाबाद। दीपावली की रात करीब दो करोड़ रुपये की आतिशबाजी फुंकने का अनुमान है। यह आतिशबाजी पर्यावरण का दीवाला निकाल देगी। वायु प्रदूषण के साथ ही शोर का स्तर मुसीबत बनेगा।
दीपावली के त्योहार के लिए बड़े पैमाने पर आतिशबाजी बिक रही है। इनमें चाइनीज आतिशबाजी भी शामिल है। तेज धमाके और चकाचौंध रोशनी वाले पटाखे लोगों की पहली पसंद हैं। आतिशबाजी की खरीदारी तेजी से हो रही है। बुधवार की रात एक साथ आतिशबाजी चलने से पर्यावरण को खासा नुकसान होगा।
आतिशबाजी में सल्फर डाई ऑक्साइड, कैडमियम, कॉपर, लेड, मैग्रीशियम व नाइट्रेट तत्व होते हैं। आतिशबाजी के जलने से यह वातावरण में शामिल हो जाते हैं। आम दिनों में रात में शोर की आवृत्ति 45 डेसीबल के करीब होती है। दीपावली की रात यह बढ़कर 70 से 90 डेसीबल हो जाती है। यह पर्यावरण व सेहत दोनों के लिए नुकसानदेह है।
लोहिया अस्पताल के नेत्र रोग विशेषज्ञ डाक्टर ब्रजेश सिंह बताते हैं कि आतिशबाजी चलाने से निकला धुआं और रोशनी आंखों की रेटीना को प्रभावित करती है। त्योहार के बाद आंखों में जलन, आंखों के लाल होना और आंखों से पानी आने जैसी समस्याएं उत्पन्न होती हैं। डा. मनोज कुमार रतमेले ने बताया कि 110 डेसीबल से अधिक धमाका करने वाले पटाखे कान के परदों पर असर डालते हैं। इससे बहरेपन का खतरा बढ़ जाता है।