फोटो-17, अंबरपुर की मड़ैया में घर को गोबर लिपाई करती नेहा। संवाद
फर्रुखाबाद। दो महीने से बाढ़ की विभीषिका झेल रहे गंगा किनारे के गांवों में अब जब जलस्तर उतर गया है। यहां जिंदगी फिर से खुद को संवारने की कोशिश में जुटी है।
दिवाली पर भले ही साज-सामान कम था, लेकिन लोगों ने उम्मीदों की लौ से दीये रोशन कर दिवाली मनाई। अमृतपुर, कंपिल और शमशाबाद क्षेत्र के कई गांवों में जहां कुछ समय पहले तक घरों और खेतों में पानी भरा था, अब लोग अपने टूटे चबूतरे और दीवारें सुधारते नजर आ रहे हैं। गांव की कलावती अपने घर का आंगन गोबर और गेरू से लीपते हुए कहा कि दिवाली पर खुशियां फिर से आएंगी। श्रीगणेश-लक्ष्मी की कृपा से गांव फिर से खुशहाल होगा।
थोड़ी दूरी पर शिवदयाल अपने मवेशियों को चारा डालते हुए बताते हैं, गंगा मैया ने इस बार हिम्मत तोड़ दी। साठ दिन से काम ठप है, लेकिन दिवाली उम्मीद लेकर आएगी, फिर सबकुछ अच्छा होगा। बाढ़ ने सिर्फ खेतों को नहीं डुबोया, बल्कि घरों का राशन, बीज और उम्मीदें भी बहा ले गई। अब आने वाली गेहूं की फसल पर नजर है, वही फिर से खुशहाली लौटेंगी। (संवाद)