अमृतपुर। गंगा व रामगंगा में आई बाढ़ का पानी कम होने के बाद अब गांवों में बीमारी फैलने लगी है। तीन वर्षीय बच्ची की रविवार को बुखार से मौत होने के बाद मंगलवार को सबलपुर पीएचसी से स्टाफ नर्स रणधीर व वार्डबॉय को भेजा गया। वहां उन्होंने बुखार, जुकाम व खांसी से पीड़ित 81 लोगों को दवा दी। पर कोई डॉक्टर नहीं भेजा गया। अभी तक ग्रामीण झोलाछाप से इलाज करा रहे थे। तहसील क्षेत्र के गांव तीसराम की मड़ैया में चारों ओर अब भी पानी भरा है और आने-जाने का रास्ता बंद है। लगभग हर घर में कोई न कोई व्यक्ति बुखार से पीड़ित है। मंजीत वर्मा की तीन वर्षीय पुत्री सुनैना को बुखार आने पर परिजन नाव से जमापुर लेकर गए थे। वहां झोलाछाप से इलाज कराया। तबीयत में कुछ सुधार होने पर परिजन बच्ची को घर वापस ले आए। रविवार को हालत बिगड़ गई। परिजन उसे इलाज के लिए ले जा रहे थे, तभी रास्ते में मौत हो गई।
ग्रामीणों का कहना है कि गांव में बुखार से कई लोग पीड़ित हैं। शिवांश को भी बुखार आने पर परिजन ने झोलाछाप के यहां दो दिन तक भर्ती रखा। वहीं, गांव की अनरव, आरती, रामकली, सचिन, रंजीत, तस्वी, अनुभव, ज्योति, मीना व रामानंद समेत कई लोग बुखार से पीड़ित हैं।
ग्रामीणों ने बताया कि जब जिलाधिकारी गांव में निरीक्षण करने आईं थीं, तब स्वास्थ्य विभाग की टीम आई थी। इसके बाद से स्वास्थ्य टीम नहीं आई। अब बाढ़ का पानी कम होने से नाव भी नहीं चल पा रही है। राजेपुर सीएचसी के प्रभारी चिकित्साधिकारी डॉ. मानसिंह ने बताया कि टीम भेजी गई होगी। इसकी जानकारी हमें नहीं है। हम लखनऊ में ट्रेनिंग पर आए हैं। वहीं, सबलपुर पीएचसी के फार्मासिस्ट ने बताया कि तीसराम की मड़ैया में स्वास्थ्य टीम भेजी गई थी। वहां बुखार, जुकाम, खांसी व एलर्जी आदि से पीड़ित 81 लोगों को दवा दी गई है।