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बिना बताए गायब हो रहे सरकारी डाक्टर

Wed, 03 Feb 2016 12:00 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला,फर्रुखाबाद
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फर्रुखाबाद। मार्केटिंग वैल्यू कम होने से दर्जनों डाक्टर वीआरएस लेकर निजी अस्पतालों में नौकरी कर रहे हैं अथवा अपना नर्सिंग होम खोलकर कमाई कर रहे हैं। कई डाक्टर ऐसे हैं, जो योगदान आख्या देने के बाद वापस नहीं आए हैं। विभाग उनकी सेवा समाप्ति का नोटिस भी जारी कर चुका है लेकिन नोटिस का कोई प्रभाव नही पड़ा है।
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बिना बताए एक साल से गायब डाक्टर
एक साल पहले नौ अक्तूबर को सीएमओ कार्यालय में अपनी योगदान आख्या देने के बाद डा. वैभव कटियार 22 नवंबर 2014 को अवकाश पर चले गए। डा. मानवेंद्र कुमार ने 13 अक्तूबर 2014 को न्यू पीएचसी बरखेड़ा में अपनी योगदान आख्या दी और वह उसी दिन से बिना किसी सूचना के लापता हो गए। इसी तरह डा. जितेंद्र कुमार ने पीएचसी न्यायामतपुर मे 10 दिसंबर 2014 को चार्ज लिया और 17 दिसंबर 2014 को वह सीएमओ को बिना जानकारी दिए लापता हो गए। बिना किसी सूचना के लापता चल रहे इन डाक्टरों को कई बार नोटिस भेजे गए लेकिन इन सबने कोई ध्यान नहीं दिया।

सरकारी नौकरी छोड़कर कर रहे निजी अस्पतालों में नौकरी
बिना बताए अस्पताल से लापता रहने वाले डा. उपेंद्र कुमार चौधरी, डा. शैलेंद्र कुमार, डा. राकेश कुमार सिंह, डा. शैलेंद्र कुमार सचान, डा. संजीव चंद्र जोशी की वर्ष 2008 में सेवा समाप्त हो चुकी है। ये सभी डाक्टर प्राइवेट  अस्पतालों में नौकरी कर रहे हैं। कभी यहां जाने माने सरकारी डाक्टर रहे चौधरी सिटी अस्पताल में भारी वेेतन पर नौकरी कर रहे हैं।
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वीआरएस लेने के बाद चला रहे नर्सिंगहोम
सरकारी अस्पतालों में कार्यरत डा. सीएन भल्ला, डा. आर. सिंह, डा. सुधा सिंह, डा. एसके सक्सेना, डा. एचपी श्रीवास्तव, डा. आरके चटवाल, डा. जेएम वर्मा अपना निजी नर्सिंगहोम चला रहे हैं। इनमें डा. एचपी श्रीवास्तव जैसे कई सरकारी डाक्टर हैं, जो जिले के स्थानीय नागरिक बन गए हैं।

योगदान आख्या दे भाग जाते
दुखद यह है कि पहले तो कोई डाक्टर सरकारी नौकरी में आना नहीं चाहता और जो आ जाते हैं वह बिना बताए गायब हो जाते हैं। वर्ष 2014 से गायब चल रहे डाक्टरों का सेवा समाप्त करने के लिए शासन को लिखा गया है। - डा. राकेश कुमार, सीएमओ

निजी अस्पतालों में ज्यादा सुविधा
डिप्टी सीएमओ के पद से अभी हाल ही में वीआरएस लेने वाले डा. केएम द्विवेदी का कहना है कि सरकारी नौकरी में डाक्टरों की मार्केटिंग वैल्यू बहुत कम है। निजी अस्पतालों में नौकरी करने पर डाक्टर को भवन, बिजली पानी का पैसा दिया जाता है। बाहर भेजने के लिए कार उपलब्ध कराई जाती है। अच्छा वेतन दिया जाता है। सरकारी डाक्टरों को मेरठ तक जाने के लिए मात्र 200 रुपये ही डीए दिया जाता है। सरकारी डाक्टरों से काम ज्यादा लिया जाता और दाम कम दिए जाते हैं। यही वजह है कि सरकारी सेवा में जाने से डाक्टर कतराते हैं।
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