फर्रुखाबाद। ट्रकों की हड़ताल का असर डीजल-पेट्रोल पर इस कदर दिखा कि एक दिन में पांच करोड़ की बिक्री हो गई। देर रात तक पेट्रोल पंपों पर वाहनों की लाइनें लगी रहीं। कोई बोतल और कट्टिया लेकर पहुंचा तो किसी ने पॉलिथीन में ही पेट्रोल भरवाया।
दो दिन चली ट्रक चालकों की देशव्यापी हड़ताल से मंगलवार दोपहर बाद नजारा बदल गया। हड़ताल अनिश्चतकालीन खिंचने की आशंका की सूचना मिलते ही चालकों ने वाहन लेकर पेट्रोलपंपों का रुख किया। इससे कई पंपों पर वाहनों की लाइनें देर रात तक लगी रहीं। वैसे बोतल में पेट्रोल देने पर भले ही प्रतिबंध हो, लेकिन लोगों और पंप कर्मचारियों पर इसका असर नहीं दिखा। इससे किसी ने बोतल तो किसी ने कट्टिया में पेट्रोल भरवाया। हद तो तब हो गई जब बढ़पुर स्थित पेट्रोल पंप एक व्यक्ति पॉलिथीन लेकर पहुंचा। पहले उसने अपनी स्कूटी की टंकी फुल कराई। इसके बाद पॉलिथीन में पांच लीटर पेट्रोल भरवाकर स्कूटी के आगे रख लिया। यह नजारा लोग देखते ही रह गए। पेट्रोल पंप पर भीड़ बढ़ने से पुलिस ने मोर्चा संभाला। अचानक डीजल-पेट्रोल की मांग बढ़ने और जरूरत से ज्यादा लेने का नतीजा यह रहा कि बुधवार सुबह कई पेट्रोलपंपों में न डीजल बचा और न ही पेट्रोल। इससे जरूरतमंदाें को दिक्कतों का सामना करना पड़ा।
जिला पूर्ति अधिकारी सुरेंद्र कुमार यादव ने बताया कि जिले के 80 पेट्रोल पंपों पर प्रतिदिन औसतन करीब 35-40 हजार लीटर पेट्रोल और 60-70 हजार लीटर डीजल की बिक्री होती है। इसके सापेक्ष मंगलवार को करीब चार लाख लीटर डीजल और 1.50 लाख लीटर पेट्रोल की बिक्री हुई। इस हिसाब से 90.19 रुपये प्रति लीटर की दर से चार लाख लीटर डीजल की 3 करोड़ 60 लाख 76 हजार रुपये की बिक्री हुई, जबकि 97.01 रुपये प्रति लीटर की दर से 1.50 लाख लीटर पेट्रोल 1 करोड़ 45 लाख 51 हजार रुपये का बिका। डीजल-पेट्रोल की कुल 5 करोड़ 06 लाख 26 हजार रुपये की बिक्री की गई।
डीएसओ ने बताया कि बुधवार को पेट्रोलपंपों पर 15 टैंकर आ चुके हैं। डिपो से लगातार डीजल-पेट्रोल के टैंकर निकाले जा रहे हैं। इससे कोई दिक्कत आने वाली नहीं है।