शिकायत करती पीड़िता शालू और उसका पति राजीव गुप्ता।
- फोटो : अमर उजाला
स्वास्थ्य कर्मियों की लापरवाही बरकरार है। इसका ताजा उदाहरण मोहल्ला बैजनाथ स्ट्रीट में देखने को मिला। यहां नसबंदी कराए जाने के बावजूद मानसिक रोगी महिला गर्भवती हो गई। महिला के पति का आरोप है कि जब उसने लोहिया अस्पताल में शिकायत की तो आनन-फानन में चिकित्सक ने उसका गर्भपात करा दिया। इससे पत्नी की मानसिक स्थिति फिर खराब हो गई।
शहर के मोहल्ला बैजनाथ स्ट्रीट निवासी राजीव गुप्ता के मुताबिक उनकी पत्नी शालू गुप्ता मानसिक रोगी हैं। उनके दो बेटियां और एक बेटा है। बीते दिनों उन्होंने पत्नी को मानसिक चिकित्सालय बरेली में दिखाया तो चिकित्सक ने पत्नी को गर्भवती न होने की सलाह दी॥ इस पर उसने 1 अप्रैल 2016 को डॉक्टर राम मनोहर लोहिया अस्पताल में पत्नी की नसबंदी करा दी। पत्नी शालू के बैंक खाते में नसबंदी कराने के रुपये भी आ गए।
मगर लगभग एक माह बाद शक के आधार पर मोहल्ले में ही स्थित नगरीय प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र रकाबगंज में पत्नी को दिखाया तो वहां उसको गर्भवती बता दिया। इसके बाद वह पत्नी शालू को लेकर 5 मई 2016 को लोहिया अस्पताल गया और महिला सीएमएस से शिकायत की। 9 मई को महिला सीएमएस ने आनन-फानन में पत्नी का गर्भपात करा दिया।
राजीव गुप्ता का कहना है कि गर्भपात के बाद से उसकी पत्नी की मानसिक स्थिति फिर खराब होने लगी। राजीव ने कहा कि शुक्रवार को वह मामले की शिकायत सीएमओ से करेगा। दोषियों के खिलाफ कार्रवाई न हुई तो स्वास्थ्य कर्मियों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराएगा। उसने आरोप लगाया कि नसबंदी के नाम पर अस्पताल में उससे 600 रुपये सुविधाशुल्क भी लिया गया।
इस बारे में सीएमएस शशिबाला का कहना है कि हो सकता है गर्भ पुराना रहा हो। कभी-कभी नसबंदी से पहले महिलाएं गर्भवती होती हैं। मगर उनको पता नहीं रहता। राजीव की पत्नी शालू का भी मामला ऐसा हो सकता है। इसी वजह से जांच में उसके गर्भवती होने का पता चला हो। फिर भी वह मामले की जांच करवाएंगी।