इलाहाबाद से आए उप शिक्षा निदेशक बेसिक ने शुक्रवार को बीएसए के साथ
कार्यालय का दरवाजा बंद कर गुफ्तगू की। उन्हाेंने कर्मचारियों की उपस्थिति
पंजिका और अभिलेखों का निरीक्षण किया। वर्तमान में नेत्रहीन एवं मूकबधिर
कैंप और बालिकाओें के टूर में गोलमाल का मामला गरमाया हुआ है। इसमें हुई
घपलेबाजी की जांच एडी बेसिक कर रहे हैं। अचानक उप शिक्षा निदेशक के आने को
भी इसी मामले सो जोड़कर देखा जा रहा है।
दो जांचों के बाद शुक्रवार को
इलाहाबाद से उपशिक्षा निदेशक ज्ञान प्रकाश एक अन्य सहयोगी के साथ बीएसए
कार्यालय में आए। उन्होंने बीएसए योगराज के साथ आफिस का दरवाजा बंद कर देर
तक बातचीत की। कर्मचारियों की हाजिरी रजिस्टर देखे। बालिका शिक्षा के
प्रभारी रहे डीसी राजेश वर्मा, सहायक वित्त एवं लेखाधिकारी नीलेश कुमार को
भी बुलाया गया। विभागीय सूत्रों की मानें तो उप शिक्षा निदेशक बेसिक शिक्षा
विभाग में हुए घपलों की जांच के लिए आए थे। इन्होंने डीसी राजेश वर्मा और
सहायक वित्त एवं लेखाधिकारी नीलेश कुमार से अभिलेख मांगे हैं। बताते
चलें कि कस्तूरबा विद्यालयों के टूर और नरेंद्र सरीन मांटेसरी स्कूल में
नेत्रहीन एवं मूक बधिर कैंप में घपलेबाजी की शिकायत शासन से हुई थी। इसकी
जांच चल रही है। 28 मई को एडी बेसिक कानपुर सतीश कुमार तीन सदस्यों की टीम
के साथ जांच करने आए थे। वह अभिलेखों की फोटो कापी और
सभी कस्तूरबा
विद्यालयों के वार्डनों के लिखित बयान साथ ले गए थे। मामला गरमाने पर डीएम
एनकेएस चौहान के आदेश पर 29 मई को एडीएम मनोज सिंघल ने बीएसए कार्यालय
पहुंच कर अभिलेखों की जांच की थी। वह भी अभिलेखों और बिलों की छाया
प्रतियां जांच के लिए ले गए थे।
उधर, उपशिक्षा निदेशक ज्ञान प्रकाश ने
जांच की बात से इनकार कर दिया। इन्होंने बताया कि वह सामान्य दौरे पर आए
हैं। जांच से कोई मतलब नहीं है। सिर्फ बीएसए से मुलाकात की है।