पांचाल घाट पर बसी आस्था की नगरी में सुबह होते ही पुण्य की डुबकी के साथ श्रद्धा की धारा बहती तो थमने का नाम ही नहीं लेती। पूरा दिन कथा, भागवत में घंटा-घड़ियाल व शंखाध्वनि गूंजती रहती है साथ ही कन्या भोज व भंडारों की भी धूम मची है। इससे कल्पवास क्षेत्र दान-पुण्य व श्रद्धा का संगम बन गया है। मेला अंतिम दौर में होने से व रविवार को अवकाश होने से खासी भीड़ रही।
मेला रामनगरिया अंतिम दौर में है, इससे मेले में खूब भीड़ उमड़ रही है। रविवार को सुबह पतित पावनी में पुण्य की डुबकी लगाने के साथ धार्मिक आयोजन शुरू हुए तो शाम तक चलते रहे। कल्पवास क्षेत्र में कथा, कन्याभोज व भंडारों का सिलसिला दिन थमा ही नहीं। अवकाश होने से मनोरंजन क्षेत्र भी भीड़ से भरा रहा। दुकानों पर ग्राहकों की लाइनें नहीं टूटीं। बड़े-बुजुर्गों ने जहां पुण्य कमाने का मौका नहीं छोड़ा, वहीं बच्चों व युवाओं ने झूले व सर्कस का भी जमकर आनंद लिया। संत बालकदास के भंडारे में प्रसाद पाने को भक्तों की भीड़ लगी रही।
भोजपुरी गीतों की बही सरिता
मेले के सांस्कृतिक पंडाल में शनिवार रात लखनऊ से आए कलाकारों ने लोकगीत सुनाए तो महफिल में तालियां गड़गड़ाने लगीं। भोजपुरी गायिका ने गीत गाकर शहीदों को श्रद्धांजलि दी। नृत्य से आकर्षित हुए लोग मंच तक पहुंच गए। पुलिस कर्मियों की लापरवाही के चलते कुछ देर के लिए अफरा तफरी मच गई। आखिरकार विरोध होता देख बाद में पुलिस कर्मियों ने व्यवस्था संभाली।