बातचीत करते डा. डीपी सिंह
- फोटो : अमर उजाला
प्रदेश के तीन जिलों में जैविक खेती कराई जाएगी। इसके लिए राष्ट्रीय कृषि विकास योजना से भारत सरकार ने सीएसए ( चंद्रशेखर आजाद कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय )को अनुमति दे दी है। पहले चरण में फर्रुखाबाद, जालौन और कानपुर नगर को लिया जाएगा। इन जिलों में पांच-पांच गांव चयनित कर सीएसए अपने पैसे से जैविक खेती कराएगा।
इससे भूमि की उर्वरा शक्ति बढ़ेगी। यह जानकारी सीएसए के वरिष्ठ वैज्ञानिक डा. डीपी सिंह ने अमर उजाला से बातचीत के दौरान दी। डा. सिंह न्यामतपुर ठाकुरान में कृषि वैज्ञानिकों के दल के साथ एक दिवसीय प्रशिक्षण में बुधवार को यहां आए थे।
डा. डीपी सिंह के अनुसार उन्होंने जैविक खेती पर एक कार्य योजना तैयार की थी। इसका नाम पॉयलट प्रोजेक्ट ऑन आर्गेनिक फार्मिंग रखा था। इस प्रोजेक्ट को भारत सरकार ने मंजूरी दे दी है। उन्होंने बताया कि पहले चरण में प्रयोग के तौर पर फर्रुखाबाद, जालौन और कानपुर नगर जिलों को रखा गया है। सबसे पहले इन जिलों में पांच-पांच गांव चयनित किए जाएंगे। यहां खेतों की मिट्टी का परीक्षण कराया जाएगा ।
इसके बाद भूमि को उपजाऊ बनाने के लिए वर्मी कंपोस्ट किसानों से गांव में ही बनवाकर उसका प्रयोग किया जाएगा। रासायनिक उर्वरकों और कीटनाशक दवाइयों का जैविक खेती में प्रयोग नहीं किया जाएगा। जैविक दवाइयां प्रयोग की जाएंगी। जैविक खाद के प्रयोग से भूमि की उर्वरा शक्ति बढ़ेगी। जैविक दवाइयों से किसानमित्र कीटों की रक्षा होगी। सबसे पहले खेतों में कंपोस्ट खाद के रूप में ढांचा तैयार कराया जाएगा । बाद में उसे पलटकर जोत दिया जाएगा और फिर वर्मी कंपोस्ट प्रयोग की जाएगी। इसके बाद खेतों में भिंडी की फसल बोई जाएगी ।
इन्हीं खेतों में गोभी की फसल तैयार होगी। कृषि वैज्ञानिक डा. सिंह ने बताया कि चयनित गांवों में 20-20 किसानों को जोड़ा जाएगा। खाद, बीज तथा फसलों को तैयार करने में होने वाले व्यय को सीएसए खुद वहन करेगा। एक साल तक सीएसए के वैज्ञानिक इन फसलों की देखरेख करेंगे। इन्होंने बताया कि इस कार्ययोजना को हरी झंडी तीन दिन पहले मिली है। सीएसए ने इस पर काम शुरू कर दिया है। अगले साल अन्य जिलों को भी शामिल किया जाएगा।