जहानगंज थाना क्षेत्र में रविवार को खेतों में काम कर रहे 11 महिलाओं और पुरुषों को जंगली सूअर ने दांतों से गंभीर रूप से घायल कर दिया। इस पर ग्रामीणों ने करीमगंज गांव के पास सूअर को घेरकर गोलियों से भून दिया। इस दौरान गांववालों ने पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों को नजरंदाज कर जायज और नाजायज असलहों से सूअर फायर किए। सुबह करीब 5 बजे जंगली सूअर ने गांव मूसाखिरिया के मोहम्मद हनीफ को घायल कर दिया। हनीफ अपने खेत में गेहूं की फसल काट रहे थे। वहां मौजूद शमीम ने उसे बचाने का प्रयास किया तो सूअर ने उन पर भी हमला बोल दिया।
इसके बाद पतौंजा के गुड्डू और बरुआ नगला के ओमप्रकाश, सिया देवी और गीता को घायल करके जंगली सूअर करीमगंज के पास पहुंचा तो वहां दानमंडी, रानूखेड़ा, करीमगंज के लोग एकत्र हो गए। घटना की सूचना यूपी 100 को दी गई। मौके पर पहुंचे यूपी 100 के जवान जंगली सूअर पर गोली चलाने में लाचार नजर आए। इस दौरान क्षेत्राधिकारी मोहम्मदाबाद उमेश शर्मा और थाना प्रभारी नरेंद्र गौतम मौके पर पहुंचे लेकिन उन लोगों ने भी गोली चलाने से मना कर दिया। इस पर ग्रामीणों में आक्रोश फैल गया और उन्होंने जायज-नाजायज असलहों से ताबड़तोड़ फायरिंग करके जंगली सूअर को मार डाला।
मौके पर पहुंचे डीएफओ ने सुअर के शव को ले जाने का प्रयास किया तो ग्रामीणोें ने जाम लगा दिया और खरीखोटी सुनाई। वहां पहुंचे भाजपा नेता फतेहचंद्र वर्मा ने लोगों को समझाकर जाम खुलवाया। वन विभाग ने जंगली सूअर की हत्या के मामले में सैकड़ों अज्ञात लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया है। डीएफओ देवेश कुमार का कहना है कि मामले की विवेचना कानपुर वन विभाग के अधिकारियों को सौंपी गई है।
पोस्टमार्टम रिपोर्ट में गोली लगने से जंगली सूअर की मौत होने की पुष्टि हुई है। डीएफओ देवेश कुमार श्रीवास्तव का कहना है कि वन्य जीवों की हत्या करना दंडनीय अपराध है। इसी वजह से वन विभाग और पुलिस के अधिकारियों ने जंगली सूअर पर गोली नहीं चलाई। वन विभाग ने अपने यहां इस मामले का मुकदमा दर्ज कर लिया है। उनका कहना है कि सुअर की मौत के बाद उसका पोस्टमार्टम कराया गया तो पाया गया कि उसकी मौत गोलियां लगने से हुई है। यहां वन विभाग में अधिकारियों का टोटा होने से विवेचना कानपुर स्थानांतरित की गई है।
उनका कहना है कि जंगली सूअर एक निरीह प्राणी है, जो किसी पर बिना वजह हमला नहीं करता। जब उसे अपनी जान का खतरा अथवा पकड़े जाने का भय उत्पन्न होता है तो वह आक्रामक हो जाता है और अपनी नुकीली दाढ़ों से लोगों को घायल कर देता है। उनका कहना है कि गर्मी की वजह से जंगली सूअर मक्के के खेतों में नमी होने की वजह से पहुंच रहे हैं।