जवाहर नवोदय विद्यालय के प्रधानाचार्य का शव संदिग्धावस्था में फंदे से
लटकटा मिला। विद्यालय के स्टाफ क्वार्टर में प्रधानाचार्य का शव मिलने से
इलाके में सनसनी फैल गई। मौके पर पहुंची पुलिस एवं प्रशासनिक अधिकारियों ने
शव उतरवाकर पोस्टमार्टम के लिए भेजा। प्रधानाचार्य के परिजनों को सूचना
भेजी गई है।
जिला उन्नाव के बीघापुर थाना क्षेत्र के ग्राम रायपुर
धनीपुर निवासी किशोर कुमार त्रिपाठी 13 जून 2013 से जवाहर नवोदय विद्यालय
मोहम्मदाबाद के प्रधानाचार्य पद पर कार्यरत थे। वह विद्यालय परिसर स्थित
सरकारी आवास पर अकेले रहते थे। सफाई कर्मचारी सुनील कुमार के मुताबिक
मंगलवार सुबह करीब 10 बजे वह उनके कमरे की सफाई करने गया तो दरवाजा बंद
मिला।
उसने दरवाजा खटखटाया लेकिन अंदर से कोई आवाज नहीं आई। इस पर उसने
दरवाजे में धक्का दिया तो वह खुल गया। अंदर प्रधानाचार्य का शव सीलिंग फैन
से लटका मिला। सुनील की सूचना पर विद्यालय के अन्य कर्मचारी भई मौके पर
पहुंचे। उप प्रधानाचार्य राकेश त्रिपाठी की सूचना पर सीडीओ श्रीनरायन शुक्ल
और कोतवाल एफएस जाफरी फोर्स के साथ मौके पर पहुंचे।
बेड पर कुर्सी रखी थी।
शव दो टाई और एक अंगौछे से बंधा मिला। पुलिस ने शव का पंचनामाभर
पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। पुलिस ने कमरे की तलाशी ली, लेकिन कोई भी
सुसाइड नोट बरामद नहीं हुआ। उप प्रधानाचार्य राकेश त्रिपाठी ने इत्तफाकिया
रिपोर्ट दर्ज कराई।
सीओ योगेश कुमार ने अन्य कर्मचारियों से पूछताछ कर पूरे
मामले की जानकारी ली। उन्होने बताया कि मृतक के परिजनों को सूचना भेजवाई
गई है। देर रात तक उनके आने की संभावना है। मामले की पड़ताल की जा रही है।
आत्महत्या के कारणों को भी जानने की कोशिश की जा रही है।
डिप्रेशन का चल रहा था इलाज
मोहम्मदाबाद।
प्रधानाचार्य किशोर कुमार त्रिपाठी कई बार डिप्रेशन में रहते थे। उनका
इलाज लखनऊ से चल रहा था। स्टाफ में इस बात की चर्चा रही कि कहीं डिप्रेशन
से परेशान होकर तो उन्होंने आत्महत्या नहीं कर ली। हालांकि उनकी आत्महत्या
करने के कारणों की गुत्थी उलझी हुई है। क्योंकि दरवाजा अंदर से बंद नहीं
था।
प्रधानाचार्य विद्यलाय परिसर स्थित सरकारी आवास में अकेले रहते थे।
उनकी पत्नी भी किसी विद्यलाय में प्रधानाचार्य बताई जाती हैं। उनके दोनों
बच्चे भी बाहर रहते हैं। लिपिक एनके अवस्थी ने बताया कि प्रधानाचार्य
त्रिपाठी ने सोमवार शाम करीब 7 बजे तक कामकाज निपटाया था। इसके बाद वह भोजन
कर अपने कमरे में सोने चले गए थे। कमरे में जाते वक्त उनके चेहरे पर किसी
तरह की चिंता नहीं दिखाई पड़ रही थी।
ऐसे में सुबह उनका शव फंदे पर लटका
मिलने से सभी आश्चर्य चकित हो गए। वहीं दूसरी तरफ विद्यालय में संविदा पर
तैनात चिकित्सक डा. वेदप्रकाश शर्मा के मुताबिक प्रधानाचार्य का इलाज संजय
गांधी आयुर्विज्ञान अस्पताल लखनऊ से चल रहा था। वह डिप्रेशन की वजह से एक
माह की छुट्टी पर भी गए थे। 31 दिसंबर को ही वह अवकाश से लौटे और एक जनवरी
को चार्ज ग्रहण किया था।