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बैंक डकैती में पुलिस नहीं जुटा पाई साक्ष्य, आरोपी दोषमुक्त

Sat, 15 Jul 2017 11:49 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो/फर्रुखाबाद
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फर्रुखाबाद। विशेष अदालत एंटी डकैती के न्यायाधीश ने ग्रामीण बैंक आर्यावर्त शाखा रोशनाबाद में दिनदहाड़े पड़ी डकैती के मुकदमे के सात आरोपियों को साक्ष्य के अभाव में संदेह का लाभ देकर दोषमुक्त कर दिया है। न्यायाधीश ने निर्णय में बैंक डकैती की विवेचना में पुलिस के लापरवाही बरतने का उल्लेख किया है।
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13 अगस्त 2012 को ग्रामीण बैंक आर्यावर्त शाखा रोशनाबाद में सुबह करीब 11:30 बजे चार बदमाश असलहे लेकर बैंक में घुस गए थे। कैशियर प्रदीप कुमार शर्मा के तमंचा लगाकर काउंटर की दराज में रखे रुपये लूट लिए। शाखा प्रबंधक श्याम प्रकाश शुक्ला से तमंचे के बल पर तिजोरी की चाबी छीन ली।  कैशियर से तिजोरी खुलवाकर उसमें रखे 1086650 रुपये लूट लिए। इसके बाद जान से मारने की धमकी देकर फरार हो गए थे। शाखा प्रबंधक श्याम प्रकाश शुक्ला ने अज्ञात बदमाशों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई थी।

शमसाबाद के तत्कालीन एसओ डीके सिसोधिया ने 4 सितंबर को तीन युवकों को पकड़ा था। इसके सहारे पुलिस ने बैंक में पड़ी डकैती का खुलासा किया। जांच कर शमसाबाद थाने के गांव फरीदपुर मंगली निवासी रामवीर लोधी, पहाड़पुर बैरागढ़ निवासी रावेश कुमार यादव, हरिश्चंद्र यादव, रव्वाना अहमदपुर बगिया निवासी शीशराम लोधी, हंसपुरा गौराई निवासी राजू उर्फ बाबा लोधी, मऊदरवाजा थाना क्षेत्र के गांव लोहापानी निवासी गुड्डू यादव उर्फ सत्यराम, एटा जिले के थाना अलीगंज के गांव ढिबैया निवासी राहुल लोधी के खिलाफ आरोप पत्र दाखिल किया था। इस मुकदमे की विवेचना डीके सिसोधिया और डीके सिंह ने की थी। मुकदमे की सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष साक्ष्य नहीं जुटा पाया। न्यायाधीश ने साक्ष्य के अभाव में सभी आरोपियों को मुकदमे से दोषमुक्त कर दिया।
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विवेचक के कार्य की कोर्ट ने की निंदा
फर्रुखाबाद। बैंक डकैती के मुकदमे में सुनाए निर्णय में न्यायाधीश ने कहा है कि पुलिस ने मनमाने ढंग से कार्य करते हुए आरोपी निर्मित करने का प्रयास किया है। जो निंदनीय कृत्य है। इस मामले में दोनों विवेचक ने आरोपियों एवं अपराधशुदा धनराशि का पता लगाने में मात्र अपनी कार्य गुजारी दिखाई है। विवेचक के इस कृत्य से न सिर्फ आरोपी दंड से वंचित रह गए। बल्कि जो धनराशि बैंक  से लूटी गई, उसकी क्षति राज्य सरकार को उठानी पड़ी। विवेचक के इस कार्य से इस मामले की सुनवाई में न्यायालय का समय भी व्यर्थ गया। दोनों विवेचकों की गलत विवेचना के कारण इस मामले का परिणाम शून्य रहा है।
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