अमृतपुर इलाके से 13 दिन पहले लापता युवक की हत्या कर दी गई है। हत्यारों
ने शव को गंगा किनारे गड्ढा खोदकर गाड़ दिया था। मृतक की बाइक को पुलिस
लाइन के पीछे ट्रीटमेंट प्लांट में फेंक दिया गया था। पुलिस की गिरफ्त में
आए एक हत्यारोपी ने इस बात का खुलासा किया है। पुलिस शव खोजने में जुटी है
लेकिन गंगा में पानी बढ़ जाने से दिक्कत आ रही है। उधर, घटना की जानकारी पर
परिजनों में कोहराम मचा है। थाना अमृतपुर के गांव नगला माखन निवासी सुनील
यादव
(23) पुत्र जदुनाथ सिंह 24 जून को बाजार जाते समय लापता हो गया था।
परिवार के लोग उसकी खोजबीन कर रहे थे। भाई पुष्पेंद्र ने 30 जून को सुनील
की गुमशुदगी दर्ज कराई थी। मामले में एसओ अमृतपुर मोहम्मद मुस्लिम ने
परिवार के लोगों से वार्ता करने के बाद सुनील के मोबाइल नंबर को सर्विलांस
पर लगा दिया। मामले में महत्वपूर्ण सुराग मिलने के बाद मंगलवार को पुलिस ने
थाना नवाबगंज के गांव चंदन नगला निवासी रघुनंदन उर्फ पप्पू यादव को हिरासत
में ले
लिया। पहले तो पप्पू ने पुलिस को गुमराह करता रहा लेकिन कड़ाई होने
पर उसने हत्या कबूल कर ली। उसने पुलिस को बताया कि सुनील की गला दबाकर
हत्या कर दी गई है और शव गंगा किनारे दबाया है। एसओ ने इस बात की जानकारी
आलाधिकारियों को दी। इसके बाद बुधवार को पुलिस पप्पू को साथ लेकर पुलिस
लाइन के पीछे कटरी में ले कर पहुंची। यहां पर ट्रीटमेंट प्लांट के अंदर से
सुनील की बाइक बरामद कर ली। इसके बाद काफी दूर चलने के बाद पुलिस गंगा
किनारे
पहुंची। जहां सुनील के शव गाड़े जाने की बात बताई गई वहां पर गंगा
बह रही है। इससे पुलिस को शव की खोजबीन करने में दिक्कत हो रही है। एसओ ने
बताया कि शव को खोजा जा रहा है। पानी बढ़ जाने के कारण दिक्कत आ रही है। शव
को तलाशने के लिए जेसीबी लगाई गई है। अमृतपुर एसओ मोहम्मद मुस्लिम ने
बताया कि शव की खोज की जा रही है। इसके बाद दर्ज मुकदमे को तरमीम कर
कार्रवाई की जाएगी।
पूर्व प्रधान पर सुपारी देकर कराई हत्या
पूर्व प्रधान ने अपनी हत्या के भय से भाड़े के हत्यारों से सुनील का कत्ल
करवा दिया। इसका खुलासा पकड़े गए आरोपी ने पुलिस के सामने किया । थाना
अमृतपुर के गांव नगला माखन निवासी मृतक सुनील यादव के पिता जदुनाथ सिंह की
गांव के ही पूर्व प्रधान पेशकार यादव से रंजिश चल रही थी। इसी रंजिश के
चलते पेशकार ने वर्ष 1994 में जदुनाथ की हत्या कर
दी थी। उस समय जदुनाथ के
बेटे देवेंद्र, उमेश, पुष्पेंद्र और सुनील छोटे थे। चारों भाइयों में सुनील
यादव तेज दिमाग था। पूर्व प्रधान को सबसे ज्यादा खतरा सुनील से ही था।
अपनी हत्या के भय से पूर्व प्रधान ने थाना नवाबगंज के गांव नगला चंदन
निवासी अपने रिश्तेदार रघुनंदन उर्फ पप्पू को सुनील की हत्या के लिए डेढ़
लाख की सुपारी दी। पप्पू ने अपने साथी
फतेहगढ़ कोतवाली के गांव कुटरा की
मढ़ैया निवासी अली मोहम्मद और थाना मेरापुर के गांव बिजौरी निवासी राजू से
इस संबंध में बात की। यह सुनील की हत्या करने के लिए तैयार हो गए। घटना
वाले दिन पप्पू गांव गया और उसने सुनील को मोबाइल पर कॉल कर बुला लिया।
उसने सुनील से उसे फर्रुखाबाद छोड़ने को कहा। इस पर सुनील बाइक ले आया।
इसके
बाद इन लोगों ने पुलिस लाइन की कटरी में शराब पी। यहां तीनों ने मिलकर
सुनील की गला दबाकर हत्या कर दी। शव को गंगा किनारे गाड़ दिया। बाइक को
ट्रीटमेंट प्लांट में फेंक दिया। घटना के बाद हत्यारे फरार हो गए थे।
सर्विलांस के सहारे पुलिस ने घटना का खुलासा कर दिया।