नर्सिंग होम, मतलब इंसानियत खत्म, पैसे की फैक्टरी चालू। कुछ ऐसा हाल है इन
निजी अस्पतालों का। गलत करें या सही, इन्हें बस अपनी कमाई से मतलब।
मंगलवार को लकूला रोड नाले से मिले चार भ्रूण इसी ओर इशारा कर रहे हैं।
लकूला रोड व आवास विकास आसपास में ही हैं। आवास विकास चिकित्सा व्यवसाय का
सबसे बड़ा हब है। यहां‘धरती के भगवान’ गर्भ में मासूमों की जान लेकर अपनी
जेब भरने में लगे हैं।
हाकिमाें की लाख कोशिशाें के बाद भी अल्ट्रासाउंड
सेंटराें पर लिंग परीक्षण नहीं रुक रहा है। न ही रुक रहा है गर्भ में
मासूम जानाें का कत्ल। इसकी खबर सबको है लेकिन कार्रवाई से बचाना
जिम्मेदाराें की फितरत है। यूं तो स्वास्थ्य महकमे के साथ ही प्रशासनिक
अधिकारियाें ने भी पिछले महीनाें अल्ट्रासाउंड सेंटरों पर छापामारी की थी।
दो-चार सेंटर सीज भी हुए।
बाकी के अभिलेख अधूरे मिले तो हिदायत दे कर छोड़
दिया। इसके बाद भी मानीटरिंग नहीं हुई कि सेंटराें के रिकार्ड दुरुस्त हो
रहे हैं या पुराना ढर्रा ही चालू है। हाकिमाें को गर्भपात का भी कोई मामला
नहीं मिला था। इन जिम्मेदाराें की आंखें शायद अब भी न खुलें। आवास
विकास के पास लकूला रोड पर मंगलवार को नाले में एक साथ चार भ्रूण मिले हैं।
यह एक से दो माह के बीच के हैं। यह पॉलीथिन में पैक थे। हालाताें से साफ
था कि किसी नर्सिंग होम ने मोटी रकम लेकर जन्म से पहले ही गर्भ में इनका
कत्ल कर दिया है। यह पहला मामला नहीं है। इससे पहले भी शहर के अलग-अलग
हिस्साें में भ्रूण मिले थे। तब भी इसेे हल्के में लिया गया था।
3 से 5 हजार रुपये में गर्भपात
गर्भपात
नर्सिंग होम्स की कमाई का सबसे बड़ा माध्यम हैं। भ्रूण के दिनाें की
संख्या के हिसाब से यहां वसूली की जाती है। जानकार बताते हैं कि डेढ़ से
तीन माह के भ्रूण के लिए 3 से 5 हजार रुपया वसूला जाता है। इससे ज्यादा
दिनाें के गर्भ के लिए यह रकम 10 हजार रुपये के करीब पहुंच जाती है।
एक कारस्तानी और
नवाबगंज
के गांव बलीपुर में रहने वाले महेंद्र पाल के पेट में दर्द था। डा. जेएम
वर्मा ने जांच के बाद पथरी बताई। आवास विकास के आरके हास्पिटल में 8 मार्च
2013 को आपरेशन के लिए इन्हें भर्ती कर लिया गया। डा. वर्मा ने इनका
स्मार्ट कार्ड नंबर 09290801801012000308 जमा कर लिया। 9 मार्च को इन्हें
अस्पताल में बेहोश करके आपरेशन से पथरी निकाले जाने की जानकारी दी गई ।
बाद
में फि र दर्द होने पर इन्हें दवाई दी जाने लगी। हालत न सुधरने पर महेंद्र
प्रयाग नरायन अस्पताल पहुंचे। यहां बताया गया कि पथरी का आपरेशन नहीं किया
गया। गुर्दे में प्लास्टिक की नली पड़ी है। महेंद्र ने न्यायालय से 15
अगस्त 2014 को डा. वर्मा के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया था। इनका कहना है कि
अब बार-बार बयान के नाम पर परेशान किया जा रहा है। कार्रवाई नहीं हो रही।
स्मार्ट कार्ड से1700 रुपये निकाल लिए गए।
वर्जन
भ्रूण मिलने की जानकारी नहीं है। ऐसा कैसे चल रहा है, इस बारे में पता लगाया जाएगा। कोई शिकायत मिलती है तो कार्रवाई की जाएगी।
डा. राकेश कुमार, सीएमओ
न स्वास्थ्य विभाग चेता और न ही पुलिस
फर्रुखाबाद। लकूला रोड पर मंगलवार की सुबह भ्रूण मिलने से सनसनी फैल गई। इसके बाद भी पुलिस को भनक नहीं लगी। सीएमओ को भी इसकी जानकारी दी गई। उन्हाेंने भी कोई कार्रवाई नहीं क राई। देर रात तक भ्रूण नाले में ही पड़े रहे।
मंगलवार को लकू ला रोड नाले में तीन भ्रूण पड़े देखे गए। एक भ्रूण सड़क के किनारे पड़ा था।यह पॉलीथिन में पैक थे। यह कॉटन में लिपटे हुए थे। आवास विकास चौकी प्रभारी को इसकी भनक नहीं लगी।
चौकी प्रभारी डेढ़ छैल से इस बावत बात की गई तो उनका कहना था कि जानकारी नहीं है। इन्हाेंने इसको लेकर किसी किस्म की कार्रवाई के लिए नहीं कहा। सीएमओ डाक्टर राकेश कुमार का कहना था कि उन्हें भी इस बारे में कोई जानकारी नहीं है। अगर किसी को इसकी जानकारी है तो वह शिकायत करें। अस्पताल प्रशासन के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।