रोती-बिलखती मृतक की पत्नी मोहिनी।
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नवाबगंज। शादी का लाल जोड़ा पहनकर आठ दिन पहले दुल्हन बनी मोहिनी मेहंदी छूटने से पहले विधवा हो गई। विधि के इस विधान को देखकर पति के शव पर बिलख रही मोहिनी के हाथों में रची मेहंदी को देख लोग कुदरत को कोसते नजर आए।
मार्ग दुर्घटना में मरे भानुप्रताप सिंह की 29 फरवरी 2016 को थाना नवाबगंज के गांव डबरी चिलसरा के रहने वाले किशनपाल की पुत्री मोहिनी के साथ शादी हुई थी। मोहिनी के मायके वाले उसकी चौथी चलाकर सोमवार को घर ले आए। उसका साला श्रवण कुमार अपनी बहन की ससुराल में ही रुक गया। श्रवण कुमार को ससुराल छोड़ने के लिए भानुप्रताप डबरी चिलसरा जा रहा था। उसी समय वह मोटरसाइकिल से हुई भिड़ंत के बाद काल के गाल में समा गया।
मोहिनी को जब यह पता लगा कि आठ दिन के बाद ही उसका सुहाग उजड़ गया है तो वह इस सदमे में विक्षिप्त सी हो गई है। उसके हाथों की मेहंदी और पांव का महावर अभी छूटा नहीं है और कुदरत ने उसके माथे का सिंदूर पोंछ दिया है। आठ दिन पहले सुहागिन बनी मोहिनी अपने पति के शव को देखकर बार-बार बेहोश हो जाती है और जब उसे होश आता है तो वह गुमसुम सी हो जाती है। बेतहाशा गम से उसके आंसू सूख गए हैं।