नगर पालिका में गलत तरीके से हुई 42 कर्मचारियों की नियुक्तियों व अन्य अनियमितताओं के मामले में तत्कालीन लेखाकार फंस गए हैं। वर्तमान ईओ ने कोतवाली में तत्कालीन लेखाकार के खिलाफ धोखाधड़ी व सरकारी दस्तावेज गायब करने का मामला दर्ज करा दिया है।
नगर पालिका के तत्कालीन प्रभारी लेखाकार राम सिंह की मृतक आश्रित के तहत 1982 में खलासी के पद तैनाती हुई थी। इसके बाद 1984 में पंप चालक के पद पर पदोन्नति हो गई। 2011 में लिपिक पद के समकक्ष समायोजित कर दिया गया। उनकी सेवा पुस्तिका एक ही लिखावट व एक ही ईओ से 7 वर्षों तक सत्यापित कराई गई है।
बाद यह रिकार्ड नगर पालिका से गायब हो गया। वर्तमान चेयरमैन सुनील कुमार चक ने शासन से करीब एक वर्ष पूर्व शिकायत की थी कि वर्ष 2016-17 में शासनादेश आया था कि वर्ष 2001 व इससे पूर्व संविदा या दैनिक वेतन पर सेवारत कर्मचारियों को विनियमित किया जाना है।
उस समय नगर पालिका में पात्र कर्मचारी दो ही थे लेकिन तत्कालीन लेखाकार ने गलत तरीके से 42 नए लोगों को दस्तावेजों में पुराना संविदाकर्मी दर्शाकर विनियमितीकरण के नाम पर नियुक्तियां कर लीं।
इस मामले में शासन से जांच कराई गई तो पाया गया कि विनियमित किए गए कर्मचारियों का नगर पालिका में वर्ष 2001 अथवा इससे पूर्व दैनिक संविदा पर लगाए जाने संबंधी कोई प्रमाण उपलब्ध नहीं है। न ही कोई वरिष्ठता सूची उपलब्ध है।
इससे जाहिर है कि 42 नियुक्तियों के मामले में विनियमितीकरण की प्रक्रिया का समुचित पालन नहीं किया गया है। इससे की गई प्रक्रिया पूरी तरह फर्जी है। जांच हुई तो प्रथमदृष्टया दोषी पाए जाने पर तत्कालीन ईओ प्रमोद श्रीवास्तव व लेखाकार रामसिंह को करीब एक वर्ष पूर्व निलंबित कर दिया गया था।
गलत तरीके से नियुक्त कर्मचारियों को एक वर्ष तक वेतन भी दिया गया। इससे लाखों रुपये के सरकारी धन की क्षति हुई है। इस मामले में सभासद आमिर खान व दीपक शुक्ला ने भी शासन से शिकायत की थी।
इस मामले की जांच लोकायुक्त में भी चल रही है। शासन से चल रही जांच में दोषी पाए जाने पर वर्तमान ईओ सीमा तोमर की तहरीर पर रामसिंह के खिलाफ कोतवाली में मुकदमा दर्ज किया गया है।
पालिका में फर्जी नियुक्तियों में तत्कालीन लेखाकार पर रिपोर्ट
ईओ ने धोखाधड़ी व दस्तावेज गायब करने में दर्ज कराया मुकदमा
आरोपियों पर पहले ही हो चुकी है निलंबन की कार्रवाई