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बाहुबली की सेवा को जुगाड़ से लगती पुलिस कर्मियों की ड्यूटी

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फर्रुखाबाद। केंद्रीय कारागार फतेहगढ़ में 12 से अधिक बाहुबली सजा काट रहे हैं। जेल में ठाठ की जिंदगी जीने वाले इन बाहुबलियों की सुरक्षा में ड्यूटी लगाने के लिए पुलिस कर्मी जुगाड़ लगाते हैं। इसके लिए उन्हें भेंट भी चढ़ानी पड़ती है। इसी खेल के चलते पेशी जाने के दौरान पुलिस अभिरक्षा से कई बाहुबली फरार हो चुके हैं। इनमें मेरठ से फरार हुए बदन सिंह उर्फ बद्दो भी शामिल है। जिसका चार दिन बाद भी पुलिस सुराग नहीं लगा सकी। हालांकि एसटीएफ ने सेंट्रल जेल पहुंचकर बदन सिंह व अन्य बाहुबलियों से मुलाकात करने वालों का ब्योरा खंगाला है। वहीं, बार-बार अभिरक्षा में जाने वाले पुलिस कर्मी भी एसटीएफ के रडार पर आ चुके हैं।
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मेरठ के थाना टीपीनगर क्षेत्र के मोहल्ला बैरीपुरा निवासी माफिया बदन सिंह उर्फ बद्दो व उसके भाई किशन को वर्ष 1996 में अधिवक्ता रवींद्र गूजर की हत्या के मामले में गौतमबुद्ध नगर न्यायालय से वर्ष 2017 में आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई थी। किशन की मौत हो चुकी है, जबकि बदन सिंह को प्रशासनिक आधार पर गत वर्ष सेंट्रल जेल भेजा गया था। 27 मार्च की शाम उसे पेशी के लिए गाजियाबाद न्यायालय सरकारी वाहन से ले जाया गया। 28 मार्च को पेशी के बाद सीधे वापस लाने के बजाय मौज-मस्ती व मोटी रकम के लालच में पुलिस कर्मी उसे मेरठ होटल में ले गए। वहां से वह फरार हो गया।

सूत्रों के मुताबिक सेंट्रल जेल में बंद बाहुबली पेशी पर जाने के लिए अपने मनपसंद पुलिस कर्मियों का चयन करते हैं। इसके लिए मोटा चढ़ावा भी चढ़ता है। बाहुबली जेल के अंदर भी ठाठ से रहते हैं। उन्हें मनमर्जी का खाना मिलने के साथ अन्य सुविधाएं व शौक के साधन भी बंदी रक्षक ही मुहैया कराते हैं। एसटीएफ ने जेल में बंद बाहुबलियों का रिकॉर्ड खंगाला तो पता चला उनके गुर्गे यहां पर स्थायी रूप से रह रहे हैं। गुर्गों के पास लग्जरी वाहनों का बेड़ा भी है। जिसका उपयोग पुलिस व जेल के लोग भी करते हैं। फिलहाल गुर्गों के साथ ही बार-बार पेशी पर जाने वाले पुलिस कर्मियों की भी एसटीएफ ने गहनता से जानकारी ली। इससे वह रडार पर आ गए हैं।
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