फर्रुखाबाद। 37 अरब के घोटाले में लखनऊ के जिला कारागार में बंद फाइनेंस कंपनी के निदेशकों के विवेचक ने बयान दर्ज किए हैं। चार आरोपियों के बयान ही दर्ज हो सके हैं। पांचवां आरोपी गाजियाबाद की जेल में बंद है। पुलिस ने मुकदमे में आईटी एक्ट की धारा बढ़ा दी है। विवेचना अब सिविल लाइन चौकी इंचार्ज से हटाकर कोतवाल को दे दी गई है।
कमालगंज थाना क्षेत्र के गांव मकरंदनगर निवासी जितेंद्र सिंह ने पिछले दिनों फाइनेंस कंपनी के निदेशक अनुभव मित्तल, सुमित मित्तल, आयुश्री अग्रवाल पत्नी अनुभव मित्तल निवासीगण कृष्णगंज (ग्रेटर नोयडा) थाना पिलखुआ जिला हापुड़ व श्रीधर पी निवासी गांव पेहुरस्ती थाना पेदुरती जिला विशाखापट्टनम राज्य आंध्र प्रदेश, महेश दयाल निवासी गांव समई थाना बरसाना जिला मथुरा के खिलाफ एक लाख सत्तर हजार रुपये धोखाधड़ी कर हड़प लेने का मुकदमा फतेहगढ़ कोतवाली में दर्ज कराया था।
मुकदमे की जांच कर रहे सिविल लाइन चौकी इंचार्ज धर्मेंद्र यादव ने बताया कि सभी निदेशक लखनऊ की जिला कारागार में बंद हैं। इन लोगों ने फाइनेंस कंपनी के माध्यम से 37 अरब का घोटाला किया था। पूरे देश में इन लोगों के खिलाफ चार सौ से अधिक धोखाधड़ी के मुकदमे दर्ज हैं। मुकदमे में बी वारंट बनावाकर लखनऊ जेल में तामील करवा दिए गए हैं। महेश दयाल गाजियाबाद की जेल में है उसका बी वारंट वहीं जाकर तामील कराया गया है। मुकदमे में आईटी एक्ट की धारा बढ़ा दी गई है। इससे अब यह विवेचना कोतवाल जसंवत सिंह को मिल गई। इस मुकदमे में मंगलवार को कोतवाल की ओर से सएसआई आरएस वर्मा ने लखनऊ की जिला जेल जाकर अनुभव, सुमित, आयुश्री, श्रीधर के बयान दर्ज किए हैं। उन्होंने बताया कि शीघ्र ही मुुकदमे में चार्जशीट दाखिल की जाएगी।