फर्रुखाबाद। फास्ट ट्रैक कोर्ट प्रथम के न्यायाधीश राकेश कुमार सिंह प्रथम ने दहेज हत्या के आरोप में सात साल से जेल में बंद पति को संदेह का लाभ देकर मुकदमे से दोषमुक्त कर दिया है। विवेचना में लापरवाही और विधि विरुद्ध कार्य करने में कायमगंज के तत्कालीन सीओ अशोक कुमार रावत के खिलाफ कार्रवाई के लिए अपर मुख्य सचिव गृह व पुलिस महानिदेशक को पत्र लिखा है।
कायमगंज क्षेत्र के आलमपुर निवासी पूरन सिंह की शादी एटा जिले के थाना अलीगंज के गांव झकरई निवासी बृजेंद्र सिंह की पुत्री विमला देवी के साथ हुई थी। ससुरालीजन दहेज में बाइक व चेन की मांग कर प्रताड़ित करने लगे। 11 मई 2015 को विमला देवी का शव घर में फंदे पर लटका मिला था।
पिता बृजेंद्र सिंह ने पति पूरन सिंह, ससुर शिव सहाय और सास सुशीला देवी के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई थी। कायमगंज सीओ रहे अशोक कुमार रावत ने जांच कर दहेज हत्या में तीनों के खिलाफ आरोप पत्र दाखिल किया। हत्या के आरोप में तीनों आरोपी जेल गए।
सास-ससुर की जमानत मंजूर हो गई, लेकिन पति पूरन सिंह को जिला एवं सत्र न्यायालय और उच्च न्यायालय से जमानत नहीं मिली। पत्नी की हत्या के आरोप में पूरन सिंह 2015 से जेल में बंद है। सुनवाई के दौरान ससुर शिव सहाय और सास सुशील देवी की मौत हो गई।
पूरन सिंह के खिलाफ मुकदमा चला। सुनवाई के दौरान बचाव पक्ष के वकील व सहायक जिला शासकीय अधिवक्ता की दलीलें सुनने के बाद न्यायाधीश ने आरोपी पति पूरन सिंह को संदेह का लाभ देकर मुकदमे से दोषमुक्त कर दिया।
न्यायाधीश ने निर्णय में कहा कि विवेचक तत्कालीन सीओ कायमगंज अशोक कुमार रावत ने गवाही में कहा कि पूरन सिंह के दो पुत्र हैं। बड़े पुत्र शिवम की आयु स्कूल रिकार्ड में 10 नवंबर 2007 अंकित है। विवेचना में बच्चों के बयान लेने की उन्होंने आवश्यकता नहीं समझी। घटना 2015 की है। उस समय पुत्र शिवम की आयु सात साल छह माह दो दिन थी।
महिला की मौत शादी के सात साल से अधिक समय बाद हुई, फिर भी विवेचक ने मुकदमे में दहेज हत्या में आरोप पत्र दाखिल किया। सीओ ने जानबूझकर विधि विरुद्ध आरोप पत्र दाखिल किया था। इससे आरोपी पति आज तक जेल में बंद है। सीओ के खिलाफ कार्रवाई करने के लिए न्यायाधीश ने अपर मुख्य सचिव गृह और पुलिस महानिदेशक को पत्र लिखा है। निर्णय की प्रति दोनों जगह भेजी जाएगी।