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Farrukhabad News: निगम की रफ्तार धीमी, लटके पर्यटन कार्य

Wed, 10 Sep 2025 12:36 AM IST
कानपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, फर्रूखाबाद
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फर्रुखाबाद। पौराणिक, धार्मिक व ऐतिहासिक धरोहरों को समेटे जनपद में सरकार पर्यटन विकास का बढ़ावा दे रही है। वहीं निर्माण निगम की धीमी रफ्तार से निर्धारित समय निकलने के बावजूद काम अधूरे पड़े हैं। निगम की सुस्ती से पर्यटन के काम पूरे नहीं हो पा रहे हैं।
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पौराणिक दृष्टि से बसी कंपिल नगरी में स्थित रामेश्वर मंदिर में त्रेता युग का शिवलिंग स्थापित है। वहीं महाभारत कालीन द्रोपदी कुंड है। इसके अलावा बौद्ध तीर्थस्थल संकिसा में विदेशी मेहमानों का आना-जाना लगा रहता है। कुछ दूरी पर बाबा नीबकरोरी धाम लाखों श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र है। पांचाल घाट मेला रामनगरिया में कुंभ का नजारा देखने को मिलता है।
श्रंगीरामपुर में श्रंगी ऋषि आश्रम है। इससे जनपद में पर्यटन विकास लगातार बढ़ रहा है। निर्माण की जिम्मेदारी पर्यटन निगम के पास है, लेकिन काम की धीमी रफ्तार के चलते समय से निर्माण पूरा नहीं हो पा रहा है।
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पर्यटन अधिकारी दीप्ति वत्स ने बताया कि पर्यटन निगम के कार्य की रफ्तार धीमी होने के संबंध में वह कई बार नोटिस दे चुकी हैं। बुधवार को जिलाधिकारी समीक्षा करेंगे। इसी के बाद कार्रवाई के लिए शासन को प्रगति रिपोर्ट भेज दी जाएगी।

कहां कितनी धनराशि से चल रहे निर्माण कार्य
8.41 करोड़ रुपये से स्वीकृत पांचाल घाट का सुंदरीकरण दिसंबर 2024 में पूरा होना था। इसके बाद यह तिथि बढ़ाकर 31 जुलाई कर दी गई। यह समय भी बीत चुका है, लेकिन काम अधूरा है। इन दिनों को गंंगा नदी का जलस्तर उफान मार रहा है।
इससे निर्माण कार्य ठप है। महमदगंज स्थित प्राचीन धूमगिरि आश्रम का सुंदरीकरण 95 लाख रुपये से स्वीकृत है। 21 जून तक निर्माण पूरा करने के आदेश थे, लेकिन ढाई माह बाद भी निर्माण अधूरा है। मोहम्मदाबाद हवाई पट्टी के निकट स्थित प्राचीन हनुमान मंदिर का सुंदरीकरण 84 लाख रुपये से स्वीकृत है। इसका निर्माण अभी तक शुरू भी नहीं हो सका।
वहीं संकिसा में पांच बौद्ध मठों का 9.17 करोड़ से काम होना है। फिलहाल अभी तक शुरू भी नहीं हो सका।। इसके अलावा पर्यटन विभाग से 1.71 रुपये की लागत से कराया गया संकिसा में बाउंड्रीवाल का निर्माण व बाबा नीबकरोरी स्थित आश्रम 1.52 करोड़ रुपये से सुंदरीकरण कार्य निर्धारित समय से कई माह बाद पूरा हो सका। यही हाल कंपिल में महाभारतकालीन द्रोपदी स्वयंवर स्थल के सुंदरीकरण का है।
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