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कोरोना ने सात वर्षीय मासूम को कर दिया अनाथ

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कोरोना ने सात वर्षीय बच्चे को कर दिया अनाथ
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फर्रुखाबाद। कोरोना महामारी ने फतेहगढ़ के एक बच्चे को अनाथ कर दिया है। मां चार वर्ष पहले छोड़कर चली गई थी। मई में कोरोना से पिता की मौत हो गई। बच्चा अब वृद्ध दादा और दादी के सहारे है। परिवार के पास आय का कोई स्रोत नहीं है।
फतेहगढ़ के मोहल्ला वनखड़िया निवासी दिव्यांग लालाराम शाक्य (80) का दूसरे नंबर का बेटा धर्मेंद्र मजदूरी करता था। आर्थिक तंगी के कारण करीब चार वर्ष पहले पत्नी धर्मेंद्र और बेटे संकल्प को छोड़कर चली गई थी। धर्मेंद्र बेटे की देखभाल कर रहा था। मई में धर्मेंद्र को बुखार आया। 16 मई को कोरोना की जांच कराने में रिपोर्ट पॉजिटिव आई।
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17 मई को धर्मेंद्र की मौत हो गई। पिता की मौत से सात वर्षीय संकल्प अनाथ हो गया। उसकी देखभाल वृद्ध दादा और दादी सुदामा देवी कर रहे हैं। लालाराम ने कहा कि जब तक वह जीवित हैं, बच्चे के लिए रोटी का इंतजाम करेंगे, आगे भगवान मालिक है।
बाल संरक्षण अधिकारी सचिन सिंह ने कहा कि घर जाकर परिवार की आर्थिक स्थिति की जांच करेंगे। पात्र होने पर मुख्यमंत्री बाल सेवा योजना के तहत चार हजार रुपये प्रतिमाह आर्थिक सहायता के अलावा बच्चे की शिक्षा व रहने की व्यवस्था कराई जाएगी।
बेटे के इलाज में बिक गई दुकान व खेती
लालाराम शाक्य के तीन बेटे थे। वह परचूून की दुकान करते थे और उनके पास थोड़ी खेती भी थी। दुकान व खेती से परिवार का खर्च चल जाता था। वर्ष 2005 में बड़े बेटे अरविंद की मौत हो गई। बहू मानवती व उसके दो बच्चों की जिम्मेदारी लालाराम पर आ गई।
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कुछ समय बाद छोटे पुत्र जितेंद्र को सूर्याटिक अर्थराइटिस बीमारी हो गई। उसके इलाज में पहले दुकान फिर खेती बिक गई थी। जितेंद्र दिव्यांग हो गया है। दूसरे नंबर को बेटा धर्मेंद्र मजदूरी पिता की मदद करता था, लेकिन मई में कोरोना ने उसे भी छीन लिया।
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