फर्रुखाबाद। स्वास्थ्य विभाग की हीलाहवाली के बाद अब लोकसभा चुनाव की आचार संहिता में तीन बीपीएचयू का निर्माण फंस गया है। वाहवाही लूटने के लिए मुख्यमंत्री से शिलान्यास करा दिया गया। वहीं निर्माण के लिए स्थल चयन भी नहीं हो सका है।
सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों पर मरीजों को जांच की बेहतर सुविधा देने के लिए शासन से छह अस्पतालों में करीब छह माह पूर्व आधुनिक लैब(बीपीएचयू) स्वीकृत की गई। एक लैब का निर्माण 47 लाख 22 हजार रुपये से होना है। इसमें सीएचसी मोहम्मदाबाद में निर्माण पूर्ण होने के करीब है। सीएचसी कायमगंज में अभी तक भूमि ही नहीं मिली। 13 मार्च को क्रिश्चियन काॅलेज सभास्थल से मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से सीएचसी कमालगंज, शमसाबाद, नवाबगंज व बरौन में बीपीएचयू निर्माण के लिए शिलान्यास करा दिया गया। इनमें सीएचसी नवाबगंज व कमालगंज में पहले से ही निर्माण शुरू कर दिया गया था।
शनिवार को लोकसभा चुनाव की घोषणा के साथ आचार संहिता लागू हो गई। अभी तक सीएचसी बरौन व शमसाबाद में निर्माण शुरू होना तो दूर की बात, स्थल चयन भी नहीं किया जा सका है। बताया जा रहा है आचार संहिता लागू होने के बाद कोई नव निर्माण शुरू नहीं हो सकता। फिलहाल निर्माण भले ही लटक गया हो, लेकिन अधिकारियों ने वाहवाही तो लूट ही ली।
बिना आदेश सरकारी संपत्ति तहस-नहस, अब भूमि भी निष्प्रयोज्य
शमसाबाद सीएचसी में बीपीएचयू निर्माण के लिए बिना आदेश तीन सरकारी आवास जेसीबी से गिरा दिए गए। जिन्हें न तो जर्जर घोषित किया किया गया और न ही मलबे की नीलामी प्रक्रिया हुई। मामले का खुलासा होने पर जिम्मेदारों ने खुद को और निर्माण एजेंसी को बचाने के लिए एक माह बाद ग्रामीण के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराकर पल्ला झाड़ लिया। लाखों के नुकसान के बाद अब बीपीएचयू निर्माण के लिए वह स्थान भी निष्प्रयोज्य कर दिया गया। दूसरे स्थान की तलाश की जा रही है। भवन ध्वस्तीकरण में लाखाें रुपये के हुए सरकारी नुकसान की भरपाई कौन करेगा, यह कोई बताने वाला नहीं है।
क्या कहते हैं जिम्मेदार
अपर जिलाधिकारी सुभाष चंद्र प्रजापति ने बताया कि भवन ध्वस्तीकरण के मामले को वह जिलाधिकारी के सामने रखेंगे। जिम्मेदारी तय कराई जाएगी। निर्माण शुरू कराने के संबंध में वह निर्वाचन आयोग की गाइड लाइन देखेंगे। नियमानुसार ही निर्माण कार्य कराया जाएगा।