फर्रुखाबाद। लोहिया अस्पताल के डॉक्टर भी अजब खेल कर रहे हैं। सीएमओ ने जिस डॉक्टर की नियुक्ति की, उन्होंने दो बच्चों के मरने की घटना की भनक लगते ही जांच से बचने के लिए एक दिन पहले ही सीएमएस को त्याग पत्र दे दिया। जबकि सीएमओ त्याग पत्र की जानकारी से इन्कार कर रहे हैं।
कोरोना की दूसरी लहर के दौरान पीकू वार्ड के संचालन के लिए सीएमओ स्तर से डॉक्टरों, स्टाफ नर्स और वार्डब्वॉय, सफाई कर्मी की नियुक्ति की गई थी। मंगलवार को जब दो बच्चों की इलाज के अभाव में मौत हो गई, तो बुधवार सुबह अस्पताल पहुंचे डॉ. अजय सूद ने बताया कि उन्होंने एक दिन पहले ही सीएमएस को अपना त्याग पत्र दे दिया है। जबकि अस्पताल कर्मियों का कहना है कि वह सुबह ड्यूटी के समय ही अस्पताल आ गए थे। उन्हें जब घटना के बारे में पता चला तो जांच की आंच से बचने के लिहाज से त्याग पत्र देने का रास्ता अपनाया। डॉ. अजय सूद ने बताया कि चूंकि काम सीएमएस के अधीन कर रहे हैं, लिहाजा उन्हें अपना त्याग पत्र सौंपा है।
सीएमएस डॉ. राजकुमार गुप्त ने भी डॉ. अजय सूद के त्याग पत्र दे देने की बात स्वीकार की। जबकि सीएमओ डॉ. अवनींद्र कुमार का कहना है कि जिस स्तर से नियुक्ति होती है, उसी को त्याग पत्र दिया जाता है। सीएमएस को भी त्याग पत्र देने की उन्हें कोई जानकारी नहीं दी गई। यह सब बच्चों के मरने की जांच से बचने लिए किया गया है। उनकी जवाबदेही को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।