रजीपुर-श्रंगीरामपुर मार्ग पर बरिया नगला में सड़क पर भरा नाली का पानी व कीचड़। संवाद न्यूज एजेंसी
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कमालगंज। जप, तप त्याग और समर्पण की धरा है शृंगी ऋषि की तपस्थली शृंगीरामपुर। यहां 17 फरवरी से कांवरिया मेले के साथ आस्था का उत्सव शुरू होगा। इसमें भागीदार बनेंगे महादेव की भक्ति डोर में बंध कर आने वाले शिव भक्त। सबसे पहले मध्यप्रदेश के कांवरिया गंगा स्नान, शृंगी ऋषि मंदिर में पूजन आदि करने के बाद शृंगीरामपुर से कांवर उठाकर पैदल प्रस्थान करेंगे। महाशिवरात्रि के दिन शिवालयों में पंहुचकर गंगा जल से महादेव का जलाभिषेक करेंगे।
इस बार 21 फरवरी को महाशिवरात्रि है। इससे 5 दिन पूर्व ही पुण्यदायिनी मां गंगा के तट पर बसी शृंगी ऋषि की तपस्थली में कांवरिया मेला शुरू हो जाएगा। पहले मध्यप्रदेश के ग्वालियर, भिंड, दतिया, मुरैना आदि से शिवभक्त कांवरियों की टोलियां शृंगीरामपुर पहुंचेंगी। जालौन, इटावा, मैनपुरी कन्नौज आदि से भी श्रद्धालु आएंगे।
यहां श्रद्धालु कांवर व सजाने का सामान खरीदकर कांवर में सजावट करते हैं। गंगा स्नान, भजन-पूजन व शृंगी ऋषि मंदिर में पूजा के बाद कांवर में गंगा जल भरकर पैदल ही वापस रवाना होते हैं। कांवरिया प्राय: जोड़े से आते हैं। पैरों में घुंघरू की झुनझुन व बम-बोल के जय घोष के साथ पैदल जाते समय कांवरिया कांवर को जमीन या किसी स्थान पर नहीं रखते। एक कांवरिया थक जाता तो साथ चल रही लोडर या डीसीएम से उतर कर जोड़े का दूसरा साथी कांवर उठा लेता है।