पांचालघाट गंगा तट पर लगा कूड़े का ढेर। संवाद न्यूज एजेंसी
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फर्रुखाबाद। गंगा मां मेरी रक्षा करो..., हर-हर गंगे... उद्घोष के साथ स्नान और फिर आचमन कर लाखों भक्त भागीरथी में स्नान करते हैं। पुण्य कमाने की आशा से आते और मां की गोद में तमाम पॉलिथीन, कांच लगी तस्वीरें, केमिकल के रंगों वाली मूर्तियों को छोड़ जाते हैं। यही नहीं तमाम कपड़े, घरों में एकत्रित होने वाली हवन की राख भी वहीं छोड़ दी जाती है।
जल से भीगी होने से उसमें सड़ांध भी उठने लगती है। दूरदराज से आने वाले श्रद्धालुओं को खासी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। कन्नौज जिले के छिबरामऊ कस्बा निवासी बालेश्वर दयाल केंद्रीय विद्यालय में शिक्षक हैं। दिल्ली से वह गंगा मां में स्नान करने परिवार सहित आए। बोले, लोग पुण्य कमाने आते हैं और पाप छोड़ जाते हैं। हमें स्वयं जागरुक होना होगा। गंगा किनारे का यह वाकई दृश्य देख दुख होता है। सभी खुद आदतें सुधारें।
बरौन गांव निवासी अवनीश कहते हैं कि वह कभी भी गंगा में कुछ नहीं डालते हैं। किनारे पर ढेर देख लगता है कि लोगों में अभी भी जागरुकता नहीं है। कभी हवन की राख लाते भी हैं, तो धार से काफी दूर बालू में दबा देते हैं। मैनपुरी निवासी करुणा शंकर दीक्षित परिवार सहित गंगा स्नान करने पहुंचे। बोले, भागीरथी की सफाई का सपना तब तक पूरा नहीं होगा, जब तक हम नहीं सुधरेंगे। सरकार क्या कर सकती है। हमें खुद ध्यान रखना चाहिए। हरपालपुर निवासी मनोज कहते हैं कि लोग दूसरों को शिक्षा देते हैं, खुद सुधरने का नाम नहीं लेते। जिम्मेदार अफसरों को चाहिए कि इसे तुरंत साफ करवाकर दूर डलवाएं। यह संक्रमण फैलाने वाला क़ूड़ा है।