फोटो-14, कमालगंज के शीतगृह में आलू की छटाई कर रहीं महिलाएं। संवाद
कमालगंज (फर्रुखाबाद)। लजीज स्वाद में सदाबहार माने जाने वाले चिपसोना आलू में मंदी आने से किसानों व व्यापारियों को झटका लगा है। बाहर की मंडियों में भाव टूटने से आलू के भाव गिरे हैं।
व्यापारियों के अनुसार चिपसोना में 150 से 200 रुपये क्विंटल की गिरावट आई है। पहले से ही मंदी की गिरफ्त में चल रहे आलू के भाव और गिर गए। आसपास के क्षेत्र में खूब पसंद किए जाने वाले चमकदार चिपसोना में जोरदार गिरावट आई है। आलू व्यापारियों का कहना है कि अभी तक 600 रुपये पैकेट (50 किलो) बिक रहा चिपसोना आलू 500 से 525 रुपये में आ गया।
किसान व आलू व्यापार से जुड़े कौशलेंद्र सिंह का कहना है कि जिन व्यापारियों ने कानपुर मंडी माल भेजा था। वहां भाव टूटने से उन्हें 150 से 200 रुपये क्विंटल का नुकसान उठाना पड़ा। इसीलिए शीतगृहों के सौदों में भी भाव टूटने लगे।
महमदपुर अचला के किसान व्यापारी इशरार खां ने कहा कि सभी मंडियों में भाव गिरे हैं। इस्लाम निराला ने बताया कि सफेद आलू ख्याती के भाव पर फिलहाल मंदी की अधिक मार नहीं है। 400 से 425 रुपये पैकेट अच्छा ख्याती बिक जा रहा है। ख्याती से अमूमन डेढ़ गुने अधिक भाव बिकने वाला चिपसोना अब उसके करीब है।
बिहार में फर्रुखाबादी लाल गुलाल की होगी गड़ाई, नेपाल तक जाएगा
बिहार के अररिया जिले के किसान व व्यापारी लाल गुलाल आलू के बीज स्थानीय शीतगृहों से ले गए हैं। अररिया निवासी किसान मो. मुजाहिद ने बताया कि एक अक्तूबर से पांच अक्तूबर तक छोटे गोल साइज के लाल गुलाल आलू का बीज खेतों में गाड़ दिया जाएगा। 55 से 60 दिन में अगैती फसल तैयार हो जाएगी।
फर्रुखाबादी बीज से बिहार में तैयार होने वाला आलू नेपाल की मंडियों में भी बिकने जाएगा। नेपाल की विराटनगर मंडी में अररिया से जोगबनी चौकी होते हुए आलू जाता है। मुजाहिद ने कहा कि लाल गुलाल बीज का आलू सबसे कम दिन 55 दिनों में तैयार हो सकता है। इसलिए शीतगृहों से 2200 से 3100 रुपये क्विंटल तक इसका बीज खरीदा गया।