फर्रुखाबाद। स्कूली बच्चों से भरी वैन में डीसीएम की टक्कर के बाद केवल सड़क सुरक्षा ही नहीं, बल्कि स्कूली वाहनों की निगरानी व्यवस्था भी सवालों के घेरे में आ गई है। बड़ा सवाल यह है कि आखिर बिना निर्धारित मानकों वाली वैन बच्चों को रोजाना कैसे ढो रही थी।
हादसे के बाद सामने आया कि जिस वैन में बच्चे सवार थे, उसका बीमा 7 जुलाई को ही समाप्त हो चुका था। वाहन का रंग भी स्कूल वैन के लिए निर्धारित सुनहरा पीला नहीं था, बल्कि वह स्लेटी रंग का था। वाहन पर न तो स्पष्ट रूप से ''स्कूल वाहन'' अंकित था और न ही स्कूल का नाम एवं संपर्क नंबर दिखाई दे रहा था। नियमानुसार स्कूल में किराये का वाहन होने पर भी उसके आगे पीछे ऑन स्कूल ड्यूटी अंकित होना चाहिए।
केंद्रीय मोटर वाहन नियमों के अनुसार स्कूल वाहनों में मजबूत ग्रिल, आपातकालीन निकास, फर्स्ट-एड बॉक्स, अग्निशमन यंत्र, जीपीएस, सीसीटीवी कैमरा, प्रत्येक बच्चे के लिए सीट बेल्ट तथा प्रशिक्षित चालक होना अनिवार्य है। प्रारंभिक जानकारी में दुर्घटनाग्रस्त वाहन कई मानकों पर खरा नहीं उतरता दिखा। हैरानी की बात यह भी रही कि स्कूल संचालक ने दुर्घटनाग्रस्त वैन और उसमें सवार बच्चों को अपना होने से इन्कार कर दिया, जबकि प्रत्यक्षदर्शियों का कहना है कि बच्चे स्कूल से छुट्टी के बाद उसी वैन से घर लौट रहे थे। यातायात प्रभारी सतेंद्र सिंह ने कहा कि वाहन के सभी दस्तावेज और मानकों की जांच कराई जाएगी। यदि नियमों का उल्लंघन पाया गया तो संबंधित वाहन संचालक के विरुद्ध कार्रवाई की जाएगी।