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मुख्यमंत्री ने सात बार फोन पर ली घटना की जानकारी

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क्षेत्र के गांव करथिया में बंधक बनाए गए 25 बच्चों को सुरक्षित निकालने और शातिर को मार गिराने के बाद शनिवार को देर शाम डीएम गांव पहुंचे। उन्होंने बताया कि मुख्यमंत्री ने घटना के दौरान पांच बार फोन कर जानकारी ली। जबकि विधायक के फोन पर दो बार काल कर एसपी से बात की और कार्रवाई के बारे में पूछा। मुख्यमंत्री ने डीजीपी को हर कीमत पर बच्चे सुरक्षित निकालने के आदेश दिए थे। मुख्य सचिव से लेकर आला अधिकारी फोन पर पल-पल की टोह लेते रहे।
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जिलाधिकारी मानवेंद्र सिंह ने पुलिस अधीक्षक डा.अनिल मिश्र व भोजपुर विधायक नागेंद्र सिंह राठौर के साथ गांव करथिया में संयुक्त रूप से पत्रकार वार्ता की। उन्होंने बताया कि शातिर बदमाश सुभाष बाथम की करतूत का संज्ञान सीधे शासन स्तर से लिया गया। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने उन्हें पांच बार फोन कर घटना की जानकारी ली। इसके साथ ही डीजीपी ओपी सिंह को तत्काल मौके पर पहुंचकर सभी बच्चे हर कीमत पर सुरक्षित निकालने के आदेश दिए।
मुख्य सचिव गृह, अपर मुख्य सचिव, डीजीपी, एडीजी (कानून व्यवस्था) लगातार फोन पर पल-पल की जानकारी लेकर बच्चों को सुरक्षित निकालने के लिए दिशा-निर्देश देते रहे। विधायक नागेंद्र सिंह राठौर ने बताया कि मुख्यमंत्री ने दो बार उन्हें फोन कर जानकारी ली। एसपी का फोन न मिलने पर उन्होंने अपने फोन से एसपी की मुख्यमंत्री से बात कराई।
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पुलिस अधीक्षक ने बताया कि आईजी मोहित अग्रवाल ने आकर दो टीमें गठित कीं। एक टीम का आईजी ने नेतृत्व कर सुभाष के मकान के पीछे से हमला किया। सीओ मोहम्मदाबाद राजवीर सिंह के नेतृत्व वाली दूसरी टीम ने मकान के आगे ग्रामीणों के सहयोग से हमला कर सुभाष व उसकी पत्नी का ध्यान बंटाया। फायरिंग होने पर सुभाष की पत्नी रूबी ने दरवाजा खोला। इस बीच पुुलिस के साथ घर में घुसे ग्रामीणों ने सुभाष व उसकी पत्नी को पकड़कर पीटना शुरू कर दिया।
बहादुर बेटी अंजली व विनीत को साथ में बैठाया
जिलाधिकारी ने कमरे की कुंडी बंद कर बच्चों की जान बचाने वाली बहादुर बेटी अंजली व विनीत को पत्रकार वार्ता के दौरान पास में ही कुर्सी डलवाकर बैठाया। दोनों की बहादुरी की सराहना करते हुए उनकी हौसलाअफजाई की। उनको शीघ्र ही सम्मानित करने की घोषणा की।
लंबी योजना के तहत बंकर में बनाया शौचालय
जिलाधिकारी मानवेंद्र सिंह ने घटनास्थल का फिर से निरीक्षण किया। उन्होंने शातिर के घर में बना तहखाना (बंकर) देखा। उसमें कहीं भी जीना नहीं था। बांस की सीढ़ी से उसमें उतरने की व्यवस्था है। बंकर में ही काफी दिनों तक बच्चों को रखने की योजना के तहत सुभाष ने उसमें हाल में ही शौचालय भी बनाया था।
इससे उसे खाना खाने से लेकर शौच तक जाने के लिए भी बाहर निकलने की जरूरत न पड़े। खास बात तो यह है कि घर के नक्शे की किसी को जानकारी न हो सके, इसके लिए सुभाष ने मकान के निर्माण में कोई मजदूर नहीं लगाया। पत्नी के सहयोग से बंकर आदि का खुद ही निर्माण किया।
चर्चित होकर शर्त मनवाना चाहता था सुभाष
मोहम्मदाबाद। शातिर सुभाष बाथम का बच्चों को बंधक बनाने के पीछे बड़ा उद्देश्य था। जिलाधिकारी ने बताया कि इतनी बड़ी घटना को अंजाम देकर वह मीडिया में हाईलाइट होना चाहता था। इसके साथ ही बच्चों को मोहरा बनाकर शासन व प्रशासन पर दबाव बनाकर अपनी शर्ते मनवाता। बड़ी धनराशि हासिल करने के साथ हत्या का मुकदमा वापस कराना भी उसका उद्देश्य था। जनता व बच्चों के सहयोग सेे उसके मंसूबों पर पानी फिर गया। सभी बच्चे सुरक्षित बचा लिए गए। वार्ता के दौरान एसडीएम सदर अनिल कुमार, तहसीलदार राजू कुमार, एएसपी त्रिभुवन सिंह आदि मौजूद रहे।
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